राजनांदगांव: मानसून के सक्रिय होने में देरी ने हर तरफ चिंता बना रखी है। खरीफ फसलों की बोआई प्रभावित हुईहै, जलाशयों में अभी भी पानी नहीं है। जून के तीसरे सप्ताह में गर्मी व उमस का दौर बना हुआ है। अविभाजित राजनांदगांव जिले में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 24 जून को दस्तक दी। पिछले 15 वर्षों में यह सबसे विलंब से पहुंचा मानसून माना जा रहा है। सामान्य वर्षों में मानसून 10 से 15 जून के बीच जिले में सक्रिय हो जाता है, लेकिन इस बार करीब 10 से 12 दिन की देरी ने किसानों के साथ जल संसाधन विभाग और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी थी।
इस वर्ष का मानसून इसलिए भी चर्चा में रहा, क्योंकि लंबे अंतराल के बाद जिले को जून के अंतिम सप्ताह तक मानसून की प्रतीक्षा करनी पड़ी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की चाल में इस तरह का ठहराव असामान्य रहा और इसी कारण वर्ष 2026 जिले के मौसम इतिहास में विलंब से पहुंचे मानसून के रूप में दर्ज हो गया। इससे पहले वर्ष 2023 में मानसून 23 जून को आया था जो कि सबसे विलंब था। यह रिकार्ड इस वर्ष टूट गया।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार इस वर्ष मानसून की रफ्तार शुरुआत में अच्छी रही, लेकिन बाद में उसका आगे बढ़ना लगभग ठहर गया। इसके चलते छत्तीसगढ़ सहित मध्य भारत के बड़े हिस्से में लंबे समय तक मानसून आगे नहीं बढ़ सका। स्थिति में बदलाव तब आया, जब अरब सागर के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय हुआ और इसके प्रभाव से पश्चिमी हवाएं मजबूत हुईं। हालांकि मानसून की आमद के बाद भी मौसम में कोई विशेष परिवर्तन अब तक नहीं आया है। मानसून की देरी का सबसे अधिक असर खेती पर पड़ा। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसान धान की रोपाई और बुआई शुरू नहीं कर सके। कई क्षेत्रों में खेत तैयार होने के बाद भी किसान बादलों का इंतजार करते रहे। वहीं जलाशयों और बराजों में भी पानी की आवक सामान्य से काफी कम रही, जिससे सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी चिंता बनी हुई है।