July 25, 2026


संसाधनों की कमी से नई तकनीक के दौर में भी पुराने ढर्रे पर पुलिस

त्रिनेत्रम फेल ई चालान का भी सिस्टम नहीं

राजनांदगांव: नई तकनीक के दौर में जिला पुलिस अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रही है। पूरे शहर में त्रिनेत्रम योजना के तहत जनसहयोग से 600 से अधिक सीसीटीवी कैमरे तो लगा दिए गए हैं, लेकिन अधिकांश के केवल कटे हुए हैं या अन्य कारणों से बंद पड़े हैं। वैसे सभी कैमरे पांच वर्ष की गारंटी अवधि में ंहैं, लेकिन मरम्मत भी नहीं कराई जा रही। दूसरी तरफ आधुनिक संसाधनों की कमी के चलते आन स्पाट आनलाइन चालान जैसी सुविधा में भी पुलिस काफी पीछे है।

चार वर्ष पहले त्रिनेत्रम योजना से जब कैमरे लगाने की शुरुआत हुई, समाजसेवियों, संस्था, संगठनों और औद्योगिक संस्थानों से 10 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक का सहयोग पुलिस को मिला। विधानसभा अध्यक्ष डा. रमन सिंह के हाथों फीता कटवाकर तामझाम के साथ इसकी शुरुआत कराई गई, लेकिन कुछ ही महीने बाद धीरे-धीरे कैमरे बंद होने लगे। वायर लूज होने, निकल जाने, केबल कटने या तकनीकी खराबी आने के कारण आधे से अधिक कैमरे केवल दिखावा बनकर रह गए हैं। बताया गया कि मेंटेनेंस के एवज में कंपनी को वार्षिक भुगतान भी करना है, लेकिन शासन-प्रशासन से राशि नहीं मिलने के कारण दुर्ग की एजेंसी मरम्मत के लिए आ ही नहीं रही।

दूसरी तरफ शहर में कुछ प्रमुख स्थानों पर आइपी कैमरे भी लगाए गए लेकिन उनमें वह सेंसर सिस्टम ही नहीं है जिससे कि चालानी व्यवस्था आधुनिक बनाई जा सके। कैमरों की निगरानी वाले कंट्रोल रूम में आवश्यक उपकरण नहीं लग पाने के कारण भी प्रदेश के अन्य शहरों की तरह यहां की पुलिस आधुनिक सुविधाओं से नहीं जुड़ पा रही है। यही कारण है कि ओवर स्पीड, तीन सवारी, बगैर हेलमेट, यातायात नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ त्वरित व प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही। इतना ही नहीं मेनुवल स्पीडो मीटर और माउथ एनेलाइजर जैसे कई उपकरण भी तकनीकी खराबी के चलते कार्यालय में ही पड़े हैं।

पाश मशीन के बिना आइपी सीसीटीवी कैमरे भी बेकाम के

शहर में कुछ जगहों पर आइपी सीसीटीवी यानी इंटरनेट प्रोटोकाल वाला कैमरा लगा है। यह एक डिजिटल वीडियो निगरानी कैमरा है, जो इंटरनेट या लोकल नेटवर्क के जरिए डेटा भेजता और प्राप्त करता है। यह पारंपरिक एनालाग कैमरों से अलग उच्च रिजाल्यूशन वीडियो, मोबाइल या लैपटाप पर लाइव एक्सेस, और मोशन डिटेक्शन जैसी स्मार्ट सुविधाएं देता है। लेकिन उसे कंट्रोल रूम से कनेक्ट कर आनलाइन चालानी जैसी कार्रवाई में इस कारण उपयोग नहीं किया जा रहा क्योंकि पुलिस के पास वैसा कोई साफ्टवेयर ही नहीं है। इतना ही नहीं आन स्पाट आनलाइन चालान वाली पाश मशीन भी पुलिस के पास नहीं है।

इस वर्ष छह माह में ये कार्रवाई

कार्रवाई प्रकरण समन शुल्क

तीन सवारी 1355 4,07,700

नो पार्किंग 467 1,39,300

बिना हेलमेट 231 1,15,500

बिना सीट बेल्ट 2,41,700

शराब सेवन 12,10, 000

तेज गति 911 9,21,1000

प्रेशर हार्न 78 23,700

माडिफाई साइलेंसर 03 10,800

मोबाईल से बात करते 25 28,000

बिना लाइसेंस 52 55,200

नाबालिगों पर कार्रवाई 10 10,000

नियमों का उल्लंघन 529 1,58,400

काला शीशा 59 1,21,000

अन्य धाराओं में 5,595 1,78,1400

योग 9870 51,96,700 

नवरतन कश्यप, प्रभारी, यातायात पुलिस


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