राजनांदगांव: कभी उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाले विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने गांव और जिले से बाहर जाकर पढ़ाई करने की थी। सीमित शैक्षणिक संस्थान, संसाधनों की कमी और दूसरे शहरों में रहने का खर्च कई युवाओं के कदम रोक देता था। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी कालेज तक पहुंचना हर विद्यार्थी के लिए आसान नहीं था। लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद शिक्षा के क्षेत्र में हुए विस्तार ने इस तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया है। अब राजनांदगांव से लेकर वनांचल के मोहला-मानपुर-चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई तक उच्च शिक्षा के अवसर बढ़े हैं। मेडिकल, कृषि, उद्यानिकी, नर्सिंग और तकनीकी शिक्षा के संस्थानों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही आगे बढ़ने के नए रास्ते मिले हैं। पेंड्री में भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल, मनकी में आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एवं अस्पताल, सुरगी में पंडित शिवकुमार शास्त्री कृषि महाविद्यालय और पेंड्री में उद्यानिकी महाविद्यालय की स्थापना से चिकित्सा और कृषि शिक्षा के क्षेत्र में अवसर बढ़े हैं। नर्सिंग कालेज, पालिटेक्निक कॉलेज, शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आइटीआइ) और प्रयास आवासीय विद्यालय जैसे संस्थानों ने विद्यार्थियों को अलग-अलग क्षेत्रों में शिक्षा और कौशल हासिल करने का अवसर दिया है।
समय का साथ पढ़ाई का स्वरूप भी बदला
सरकारी स्कूलों, कालेजों के साथ-साथ उच्च शिक्षा संस्थानों में समय के साथ-साथ पढ़ाई का भी स्वरूप पूरी तरह से बदल गया है। स्कूलों-कालेजों में डिजिटल पढ़ाई हो रही है। शिक्षा पोर्टल, वीडियो लेक्चर, आनलाइन कक्षाएं और डिजिटल लाइब्रेरी जैसे संसाधनों के ज़रिए छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में मदद मिल रही है। इससे डिजिटल साक्षरता भी बढ़ी और तकनीकी शिक्षा को लेकर उत्साह बना हुआ है। स्कूलों-कालेजों में गुणवत्ता सुधार, मूल्यांकन, इनोवेशन प्रोजेक्ट्स, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं के लिए नई उम्मीद की किरण भी साबित हुई है।
तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा पर जोर
जिले में सिर्फ सामान्य स्नातक पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि तकनीकी, मेडिकल, नर्सिंग, फार्मेसी, आयुर्वेद, आइटीआई जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को भी बल दिया गया है। राजनांदगांव मेडिकल कालेज, नर्सिंग कालेज, और कृषि एवं बागवानी महाविद्यालयों की स्थापना ने क्षेत्र में रोजगारपरक शिक्षा को नया आयाम दिया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति की है, वह न केवल प्रेरणास्पद है बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं के लिए नई उम्मीद की किरण भी साबित हुई है।