September 09, 2026


नए राशन कार्ड पर ब्रेक सर्वर डाउन से वितरण भी सुस्त

परेशानी: सेतु पोर्टल के अपग्रेडेशन से एक माह से अटके आवेदन, 409 पीडीएस दुकानों में रोज सिर्फ 600-700 उपभोक्ताओं को मिल पा रहा राशन

राजनांदगांव: जरूरतमंद परिवारों के लिए नया राशन कार्ड बनवाना और पुराने कार्ड में जरूरी संशोधन कराना इन दिनों बड़ी चुनौती बन गया है। सेतु पोर्टल में चल रहे अपग्रेडेशन कार्य के कारण करीब एक माह से नए राशन कार्ड बनाने और संशोधन की प्रक्रिया पर लगभग ब्रेक लग गया है। स्थिति यह है कि नगर निगम, पंचायतों व खाद्य विभाग में आनलाइन के साथ ही आफलाइन माध्यम से भी राशन कार्ड संबंधी आवेदन नहीं हो पा रहे हैं। इससे शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक जरूरतमंद लोग संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। 

सेतु पोर्टल में तकनीकी अपग्रेडेशन का कार्य चलने के कारण करीब एक माह से राशन कार्ड संबंधी सेवाएं प्रभावित हैं। आनलाइन आवेदन नहीं हो पाने के साथ ही आफलाइन प्रक्रिया भी सुचारू रूप से संचालित नहीं हो रही है। इसके चलते लोग खाद्य विभाग और संबंधित कार्यालयों में पहुंचकर जानकारी ले रहे हैं, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण उन्हें तत्काल राहत नहीं मिल पा रही है।

इधर, राशन वितरण व्यवस्था भी सर्वर की समस्या से प्रभावित हो रही है। जिले में कुल 409 सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकानें संचालित हैं। सामान्य दिनों में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को प्रतिदिन राशन का वितरण किया जाता है, लेकिन सर्वर डाउन होने और तकनीकी दिक्कतों के कारण वितरण की गति काफी धीमी पड़ गई है। मौजूदा स्थिति में जिलेभर में प्रतिदिन मुश्किल से 600 से 700 उपभोक्ताओं को ही राशन का वितरण हो पा रहा है। पीडीएस दुकानों में उपभोक्ताओं को बायोमेट्रिक सत्यापन और आनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद राशन दिया जाता है।

 दस्तावेज लेकर कार्यालय पहुंच रहे आवेदक

राशन कार्ड बनवाने की उम्मीद में लोग जरूरी दस्तावेज लेकर संबंधित कार्यालय पहुंच रहे हैं। लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उन्हें कई बार लौटना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि राशन कार्ड केवल खाद्यान्न लेने का दस्तावेज नहीं है, बल्कि कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी इसकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में कार्ड नहीं बनने से अन्य योजनाओं का लाभ लेने में भी परेशानी हो सकती है। वहीं सर्वर बार-बार डाउन होने से सत्यापन में समय लग रहा है और कई बार उपभोक्ताओं को बिना राशन लिए ही वापस लौटना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को इससे विशेष परेशानी हो रही है।



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