रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन ने निजी और अशासकीय विद्यालयों में 'छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक 2020' को कड़ाई से लागू करने के लिए प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को कड़े निर्देश जारी किए हैं। मुख्य सचिव द्वारा जारी इस आदेश का उद्देश्य पालकों से नियम विरुद्ध लिए जा रहे अधिक शुल्क पर रोक लगाना है।
फीस वृद्धि के लिए निर्धारित कड़े मानक
शासन ने स्पष्ट किया है, राज्य में 26 अगस्त 2020 से प्रभावी शुल्क विनियमन कानून के तहत प्रत्येक निजी स्कूल में 'विद्यालय फीस समिति' का गठन अनिवार्य है।
फीस बढ़ाने से पहले ये जरुरी
8% की सीमा: विद्यालय फीस समिति प्रतिवर्ष पिछले वर्ष के शुल्क से अधिकतम 8 प्रतिशत तक ही वृद्धि का अनुमोदन कर सकती है।
विशेष अनुमति: यदि कोई विद्यालय 8 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि करना चाहता है, तो उसे अनिवार्य रूप से 'जिला फीस समिति' से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होगा।
प्रशासनिक निगरानी और कार्यवाही
निजी विद्यालयों पर नियंत्रण रखने के लिए प्रशासन ने जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और नोडल प्राचार्यों की जवाबदेही तय की है:
जिला शिक्षा अधिकारी 'जिला शुल्क विनियमन समिति' के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
नोडल प्राचार्य विद्यालय स्तर की समितियों में सदस्य बनकर समन्वय सुनिश्चित करेंगे। शासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है, नियम विरुद्ध शुल्क वृद्धि पाए जाने पर संबंधित निजी विद्यालय के विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
पढ़िए क्या लिखा है आदेश में
राज्य में 26 अगस्त 2020 से छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक 2020 लागू है। इस विधेयक के अध्याय-2 के कंडिका 3 के अनुसार प्रत्येक निजी विद्यालयों में, विद्यालय फीस समिति का गठन किया जाना है। विद्यालय फीस समिति प्रतिवर्ष, पूर्व वर्ष के शुल्क से अधिकतम् 8 प्रतिशत की सीमा में शुल्क वृद्धि का अनुमोदन कर सकेगी। 8 प्रतिशत से अधिक शुल्क वृद्धि की स्थिति में जिला फीस समिति से अनुमोदन कराना
प्रत्येक निजी विद्यालय में फीस विनियमन समिति को क्रियाशील बनाया जाये। निजी विद्यालयों से समन्वय एवं नियंत्रण के लिए नोडल प्राचार्य की भूमिका महत्वपूर्ण होती है तथा नोडल प्राचार्य विद्यालय शुल्क विनियमन समिति के सदस्य भी होते हैं। विद्यालय फीस समिति में नोडल प्राचार्य भी सदस्य होते हैं। जिला शिक्षा अधिकारी, जिला शुल्क विनियमन समिति के सदस्य सचिव होते हैं। अतः जिला शिक्षा अधिकारी एवं नोडल प्राचार्यों के माध्यम से निजी स्कूलों में छत्तीसगढ़ अशासकीय शुल्क अधिनियम का पालन सुनिश्चित करावें। नियम विरूद्ध शुल्क वृद्धि किये जाने पर निजी विद्यालय के विरूद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करें।
