राजनांदगांव: रसोई गैस (एलपीजी) उपभोक्ताओं के लिए काम की खबर है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन उपभोक्ताओं ने अब तक अपना बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण (ई-केवाईसी) नहीं कराया है, उनकी एलपीजी सब्सिडी रोकी जा सकती है। समय रहते प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले उपभोक्ताओं को भविष्य में सब्सिडी का लाभ मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। गैस एजेंसियों में बायोमेट्रिक सत्यापन कराने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। कई उपभोक्ता अंतिम समय में प्रक्रिया पूरी कराने के लिए एजेंसियों का रुख कर रहे हैं। राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-चौकी तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिलों में कुल पांच लाख 23 हजार एलपीजी कनेक्शनधारी हैं। इनमें से अब तक बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अपना बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा करा लिया है, लेकिन एक लाख 20 हजार से अधिक उपभोक्ता अभी भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं। यही वह वर्ग है, जिसे सबसे अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
सुबह से लग रही कतार
गैस एजेंसियों में गैस कनेक्शनधारियों की सुबह से कतार लग रही है। एजेंसी संचालकों ने बताया कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का उद्देश्य वास्तविक उपभोक्ताओं की पहचान सुनिश्चित करना और सब्सिडी व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है। सरकारी सहायता का लाभ केवल पात्र और सक्रिय उपभोक्ताओं तक ही पहुंचे। मंत्रालय द्वारा इस प्रक्रिया को अनिवार्य किए जाने के बाद सभी गैस कंपनियों को उपभोक्ताओं का सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिन उपभोक्ताओं का आधार नंबर गैस कनेक्शन से जुड़ा हुआ है, उन्हें भी केवल आधार लिंक होने से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया अलग है और इसे पूरा कराना आवश्यक है। गैस एजेंसियों ने भी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और जल्द से जल्द बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी कर लें। इससे भविष्य में सब्सिडी से जुड़ी किसी भी प्रकार की परेशानी से बचा जा सकेगा।
मोबाइल नंबर पंजीकृत नहीं, बुकिंग में हो रही दिक्कत
एलपीजी गैस बुकिंग के लिए पंजीकृत नंबर को मान्य कर दिया गया है। एजेंसी में पंजीकृत नंबर से ही एलपीजी सिलिंडर की बुकिंग होगी। नंबर पंजीकृत नहीं होने पर गैस कनेक्शनधारियों को गैस एजेंसियों से संपर्क करने कहा जा रहा है। फोन-पे, गुगल पे में आनलाइन बुकिंग भी लंबे समय से नहीं हो पा रही है। इसके चलते गैस कनेक्शनधारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरकार की इस पहल का उद्देश्य एलपीजी वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है, लेकिन जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं कराया है, उनके लिए यह चेतावनी किसी अलार्म से कम नहीं है।