आरंग। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से “जल ही जीवन है” का संदेश लगातार दिया जा रहा है, लेकिन प्रदेश के जल संसाधन विभाग में बड़ी संख्या में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इससे विभाग के मैदानी और कार्यालयीन कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ने की बात सामने आई है। मैदानी अमले की कमी के कारण नहरों के रखरखाव और निगरानी का काम प्रभावित होने के साथ पानी की बर्बादी रोकने में भी परेशानी हो रही है। वहीं कार्यालयीन स्तर पर भी कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता प्रभावित होने की शिकायत है।
रायपुर जिला जल उपभोक्ता संस्था संघ के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मुख्य सचिव विकास शील तथा मुख्यमंत्री सचिवालय के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को ई-मेल के माध्यम से ज्ञापन भेजा है। उन्होंने जल संसाधन विभाग में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों पर शीघ्र नियुक्तियां करने की मांग की है।
तृतीय श्रेणी के 2,750 और चतुर्थ श्रेणी के 553 पद खाली
ज्ञापन में विभाग के स्वीकृत और रिक्त पदों का विस्तृत ब्योरा देते हुए बताया गया है कि तृतीय श्रेणी के कुल 4,679 स्वीकृत पदों में से 2,750 पद रिक्त हैं। इसी तरह चतुर्थ श्रेणी के 803 स्वीकृत पदों में से 553 पद खाली पड़े हैं। इस तरह दोनों श्रेणियों में बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से विभागीय व्यवस्था पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ रहा है।
मैदानी अमले से जुड़े पदों की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। उप अभियंता (सिविल) के 1,303 स्वीकृत पदों में से 840, अमीन के 691 में से 464, सिंचाई निरीक्षक के 20 में से 5 तथा बांध निरीक्षक के 16 में से 12 पद रिक्त हैं। भूगर्भ सहायक, भौमिक सहायक एवं भूजलविद सहायक के सभी 19 पद, भू-रसायन सहायक के सभी 4 पद, चैनमेन के सभी 12 पद तथा मुख्य मानचित्रकार के सभी 6 पद भी रिक्त बताए गए हैं।
कार्यालयीन पदों की भी बड़ी संख्या में कमी
ज्ञापन के अनुसार प्रोसेस सर्वर के 22 में से 20, उप अभियंता (विद्युत/यांत्रिकी) के 173 में से 65, मानचित्रकार (सिविल) के 81 में से 25, मानचित्रकार (विद्युत/यांत्रिकी) के 12 में से 7, सहायक मानचित्रकार (सिविल) के 96 में से 33 तथा विद्युत/यांत्रिकी के 15 में से 13 पद रिक्त हैं।
अनुरेखक (सिविल) के 134 में से 117 और विद्युत/यांत्रिकी विभाग के 10 में से 8 पद भी खाली हैं। वरिष्ठ अधीक्षक के 9 में से 7, मंडल स्तर अधीक्षक के 17 में से 10, निज सहायक ग्रेड-1 के 8 में से 4 तथा ग्रेड-2 के 11 में से 3 पद रिक्त बताए गए हैं।
इसी प्रकार सहायक ग्रेड-1 के 70 में से 29, सहायक ग्रेड-2 के 557 में से 142 तथा सहायक ग्रेड-3 के 784 में से 481 पद रिक्त हैं। डाटा एंट्री ऑपरेटर के 366 में से 290, स्टेनो टाइपिस्ट के 87 में से 59, अनुसंधान सहायक के 25 में से 22 और प्रयोगशाला तकनीशियन के 25 में से 22 पद खाली हैं।
चतुर्थ श्रेणी में भी स्थिति गंभीर
ज्ञापन में चतुर्थ श्रेणी के पदों की स्थिति भी सामने रखी गई है। वाहन चालक के 38 में से 20, दफ्तरी के 77 में से 56, भृत्य के 641 में से 421, चौकीदार के 21 में से 20 तथा फर्राश/स्वीपर के 20 में से 16 पद रिक्त बताए गए हैं। प्रयोगशाला परिचारक के स्वीकृत सभी 8 पद, जमादार का 1 पद तथा प्रयोगशाला अनुचर का 1 पद भी रिक्त है।
आउटसोर्सिंग और संविदा से चलाया जा रहा काम
भूपेंद्र शर्मा ने ज्ञापन में कहा है कि कुछ रिक्त पदों पर आउटसोर्सिंग और संविदा नियुक्तियों के माध्यम से काम चलाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के साथ कुछ पदों को समाप्त किए जाने की बात भी सामने आई है। इससे विभाग के स्थायी मैदानी और कार्यालयीन अमले की संख्या लगातार प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि जल संसाधन विभाग का काम सीधे तौर पर किसानों, सिंचाई व्यवस्था और जल संरक्षण से जुड़ा हुआ है। ऐसे में पर्याप्त मानव संसाधन के बिना नहरों की नियमित निगरानी, रखरखाव, जल वितरण और विभागीय कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री और शासन के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि विभाग के सभी रिक्त पदों की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार नियमित भर्ती की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए, ताकि मैदानी एवं कार्यालयीन कार्यों में गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।