राजनांदगांव :- गठुला से भेड़ीकला मार्ग पर कृषि उपज, विशेषकर धान की खरीदी और उसके सीधे पोहा मिलों तक पहुंचने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप सामने आ रहे हैं कि बड़ी मात्रा में धान मंडी की निर्धारित प्रक्रिया से बाहर सीधे मिल परिसरों में पहुंचाया जा रहा है। यदि ऐसा हो रहा है तो संबंधित खरीदी, परिवहन, भुगतान और मंडी शुल्क से जुड़े दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार अधिसूचित कृषि उपज की बिक्री अथवा प्रसंस्करण पर निर्धारित परिस्थितियों में मंडी शुल्क देय होता है। बिना शुल्क भुगतान के कृषि उपज के प्रसंस्करण अथवा बिक्री की स्थिति में कानून में शुल्क वसूली के प्रावधान भी हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गठुला–भेड़ीकला मार्ग पर किसानों से खरीदा गया धान सीधे पोहा मिलों में खाली कराया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन को यह जांचना चाहिए कि संबंधित धान की खरीदी किसके नाम से, किस दर पर, किस रसीद अथवा बिल के माध्यम से और किस मंडी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
पोहा मिल के लेनदेन की जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर सुरेश खंडेल से संबंधित पोहा मिल के कारोबार को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित मिल के पिछले खरीद रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, बिल-बुक, बैंक लेनदेन, परिवहन दस्तावेज, जीएसटी रिकॉर्ड तथा मंडी शुल्क भुगतान का मिलान कराया जाना आवश्यक है।
यदि जांच में मंडी शुल्क अथवा अन्य वैधानिक देयों से बचने के लिए कच्चे बिलों में कारोबार करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि सभी लेनदेन नियमानुसार पाए जाते हैं तो आरोपों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
करोड़ों के कारोबार का दावा, जांच से खुलेगा सच
स्थानीय स्तर पर इस कारोबार को करोड़ों रुपये का बताया जा रहा है, लेकिन वास्तविक कारोबार और कथित राजस्व नुकसान की राशि का निर्धारण केवल आधिकारिक दस्तावेजों और जांच के बाद ही किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार के पोर्टल पर कर एवं शुल्क संबंधी भुगतान और रिटर्न की व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।
मांग है कि जिला प्रशासन, कृषि उपज मंडी विभाग और संबंधित कर अधिकारियों की संयुक्त टीम गठुला–भेड़ीकला मार्ग तथा वहां संचालित पोहा मिलों का भौतिक निरीक्षण करे। किसानों से खरीदे गए धान की मात्रा और मिल में पहुंचे धान का मिलान, मंडी शुल्क भुगतान, परिवहन दस्तावेज, खरीद-बिक्री बिल तथा बैंक भुगतान की जांच की जाए।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला सामान्य वैध व्यापार का है अथवा कहीं नियमों को दरकिनार कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया है।
प्रशासन से मांग है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और यदि कोई अनियमितता नहीं मिलती है तो संबंधित व्यापारियों पर लगाए जा रहे आरोपों की भी स्थिति स्पष्ट की जाए।* कितनी बिजली की यूनिट खपत हुई है उसे हिसाब से खरीदी निकल जाएगी और यह भी पता चल जाएगा मंडी टैक्स की कितनी चोरी हुई है और कितने करोड़ का माल कच्चे में खरीदा गया है कृषि उपज मंडी की भूमिका एवं खाद्य विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में है