राजनांदगांव :- शहर के कन्हारपुरी हायर सेकेंडरी स्कूल की जर्जर हालत नए शिक्षण सत्र 2026-27 में चिंता का विषय बन गई है। लगभग 700 छात्र-छात्राओं वाले इस विद्यालय में भवन, शौचालय और मूत्रालय की स्थिति बेहद खराब है। बरसात के मौसम के बीच छात्र-छात्राएं और शिक्षक अध्ययन-अध्यापन के लिए तो तैयार हैं लेकिन स्कूल की खस्ताहाल व्यवस्था किसी बड़े हादसे को न्योता देती नजर आ रही है। यदि समय रहते मरम्मत और सुधार कार्य नहीं कराया गया तो किसी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन पर ही आएगी।
शहर के कन्हारपुरी हायर सेकेंडरी स्कूल की जर्जर स्थिति को लेकर विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों में भारी चिंता व्याप्त है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है और स्कूल में नियमित रूप से अध्ययन-अध्यापन की गतिविधियां संचालित होने लगी हैं लेकिन विद्यालय भवन की हालत बेहद खस्ताहाल बनी हुई है। जानकारी के अनुसार विद्यालय में लगभग 700 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। स्कूल की कई दीवारों पर दरारें दिखाई दे रही हैं छत के हिस्सों से प्लास्टर झड़ रहा है तथा बरसात के दिनों में भवन की मजबूती को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विद्यार्थियों और शिक्षकों को हर दिन भय के माहौल में स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। विद्यालय परिसर में स्थित शौचालय और मूत्रालय की स्थिति भी अत्यंत खराब है। साफ-सफाई के अभाव और टूट-फूट के कारण छात्र-छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से छात्राओं के लिए यह स्थिति और भी अधिक चिंता का विषय बनी हुई है। स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं की कमी शिक्षा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। बरसात का मौसम शुरू हो चुका है और ऐसे समय में जर्जर भवन में कक्षाएं संचालित करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं और विद्यार्थी भी पढ़ाई के प्रति उत्साहित हैं लेकिन स्कूल भवन की स्थिति लगातार चिंता बढ़ा रही है। किसी भी समय छत या दीवार का हिस्सा गिरने जैसी घटना घटित हो सकती है जिससे विद्यार्थियों और स्टाफ की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। अभिभावकों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय भवन की तत्काल तकनीकी जांच कराकर आवश्यक मरम्मत एवं पुनर्निर्माण कार्य कराया जाए। साथ ही शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी दुरुस्त किया जाए ताकि छात्र-छात्राएं सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी। ऐसे में आवश्यक है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाएं।