राजनांदगांव :- छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक बिंदल ने शहर में शुरू हुई क्विक कॉमर्स सेवा को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि राजनांदगांव की पहचान उसका मजबूत और पारंपरिक बाजार है। यहां का व्यापार केवल व्यवसाय नहीं बल्कि सामाजिक विश्वास, पारिवारिक रिश्तों और हजारों लोगों की आजीविका का आधार है। उन्होंने कहा कि 1 जुलाई से शहर में ब्लिंकिट की सेवाएं शुरू होने के बाद स्थानीय व्यापारियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। यदि समय रहते व्यापारी संगठित होकर रणनीति नहीं बनाते हैं तो भविष्य में छोटे व्यापारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
श्री बिंदल ने कहा कि गंज चौक, अनुपम नगर, लखोली और बजरंगपुर सहित शहर के कई क्षेत्रों में क्विक कॉमर्स कंपनियां अपनी गतिविधियां बढ़ा रही हैं। शुरुआत में 10 मिनट में सामान मिलने की सुविधा ग्राहकों को आकर्षित करेगी लेकिन इसके दूरगामी परिणामों को भी समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महानगरों की तुलना में राजनांदगांव का व्यापारिक ढांचा पूरी तरह अलग है। यहां दुकानदार और ग्राहक के बीच वर्षों पुराने भरोसे और आत्मीयता का रिश्ता है। यदि यह व्यवस्था कमजोर हुई तो इसका असर पूरे स्थानीय बाजार पर पड़ेगा।श्री बिंदल ने कहा कि शहर के मोहल्लों में वर्षों से संचालित किराना और जनरल स्टोर स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यही दुकानदार जरूरत पड़ने पर उधारी देते है देर रात तक दुकान खोलते हैं और हर परिस्थिति में ग्राहकों के साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में ग्राहक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर चले गए तो सबसे पहले इन्हीं छोटे व्यापारियों की आय प्रभावित होगी। श्री बिंदल ने कहा कि राजनांदगांव स्टेशनरी और कॉपी व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। अब क्विक कॉमर्स कंपनियां पेन, कॉपी, किताबें और स्कूल का अन्य सामान भी घर तक पहुंचा रही हैं। इससे स्थानीय स्टेशनरी व्यापारियों के व्यवसाय पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राखी, दीपावली, होली और अन्य त्योहारों के दौरान शहर के सदर बाजार, गोल बाजार और अन्य व्यापारिक क्षेत्रों में होने वाली खरीदारी छोटे व्यापारियों की सालभर की आय का बड़ा आधार होती है। यदि बड़ी कंपनियां भारी छूट देकर ग्राहकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित करेंगी तो पारंपरिक बाजार की रौनक प्रभावित हो सकती है। श्री बिंदल ने स्पष्ट कहा कि व्यापारी आधुनिक तकनीक या डिजिटल व्यवस्था के विरोधी नहीं हैं। बदलते समय के साथ व्यापार का डिजिटल होना आवश्यक है लेकिन ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिससे स्थानीय व्यापार और छोटे दुकानदारों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाए। श्री बिंदल ने इस चुनौती से निपटने के लिए पांच प्रमुख सुझाव दिए सभी व्यापारिक संगठनों की तत्काल संयुक्त बैठक आयोजित की जाए, ताकि भविष्य की साझा रणनीति बनाई जा सके। स्थानीय दुकानदारआपका अपना परिवार जैसे जनजागरण अभियान चलाए जाएं जिससे लोग स्थानीय बाजार से खरीदारी के महत्व को समझें। शहर के व्यापारी मिलकर अपना स्थानीय होम डिलीवरी नेटवर्क विकसित करें, ताकि ग्राहकों को भी त्वरित सुविधा मिल सके। अधिक से अधिक व्यापारी ONDC प्लेटफॉर्म से जुड़ें, जिससे बिना अधिक कमीशन दिए ऑनलाइन ग्राहकों तक पहुंच बनाई जा सके। प्रशासन से डार्क स्टोर और क्विक कॉमर्स गतिविधियों के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग की जाए, ताकि सभी व्यापारियों को समान अवसर मिल सके। श्री बिंदल ने कहा कि यह केवल किसी एक व्यापारी या एक बाजार का मुद्दा नहीं है बल्कि पूरे शहर की अर्थव्यवस्था और हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़ा विषय है। यदि समय रहते व्यापारी, प्रशासन और नागरिक मिलकर संतुलित रणनीति नहीं बनाते हैं तो आने वाले वर्षों में पारंपरिक बाजार को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि विकास और तकनीक का स्वागत होना चाहिए लेकिन स्थानीय व्यापार को समाप्त करके मिलने वाली सुविधा किसी भी शहर के लिए लंबे समय में नुकसानदेह साबित हो सकती है। इसलिए राजनांदगांव के सभी व्यापारियों को एकजुट होकर आधुनिक तकनीक को अपनाने के साथ-साथ अपने पारंपरिक बाजार और स्थानीय व्यापार की मजबूती के लिए अभी से प्रयास शुरू करने होंगे।