आरंग। छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित रंगकर्मी, लोक कलाकार एवं सांस्कृतिक संरक्षक डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर को रंगमंच एवं लोककला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान 15 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित भव्य राष्ट्रीय सम्मान समारोह में प्रदान किया गया।
भारतीय रंगमंच एवं लोक संस्कृति के संरक्षण, पारंपरिक लोक कलाओं के संवर्धन, सांस्कृतिक विरासत के प्रचार-प्रसार तथा कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए डॉ. चंद्राकर को यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया।
डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रंगमंचीय प्रतिभा और लोक कला प्रस्तुतियों के लिए पहचान रखते हैं। अभिनय, निर्देशन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तथा लोक कलाओं के माध्यम से उन्होंने समाज को भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी रचनात्मक दृष्टि, सांस्कृतिक सेवा और समर्पण ने उन्हें रंगमंच एवं लोककला के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान दिलाई है।
उन्होंने नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने, युवा कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने तथा भारतीय लोक कला की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य किया है। उनके मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से अनेक युवा कलाकारों ने रंगमंच और लोककला के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उनका मानना है कि लोक कला किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा होती है। इसी विचारधारा के साथ वे भारतीय लोक संस्कृति के संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन के लिए लगातार कार्यरत हैं।
डॉ. चंद्राकर ने अपने लोककला मंच के माध्यम से देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों एवं महोत्सवों में छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला-संस्कृति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। इनमें लाल किला नई दिल्ली, राष्ट्रीय मानव संग्रहालय नई दिल्ली, इंदिरा कला केंद्र नई दिल्ली, पृथ्वी थिएटर मुंबई, एनसीपी थिएटर मुंबई, रविंद्र मंच, कोलकाता, भुवनेश्वर, संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित विभिन्न कार्यक्रम, अगरतला, गुवाहाटी, शिलांग, विरासत महोत्सव देहरादून, कुल्लू दशहरा, अंतरराष्ट्रीय गिरमिटिया महोत्सव कुशीनगर, गोवा, नासिक, जयपुर, अहमदाबाद, नागपुर, जोधपुर, झांसी, चेन्नई, भारत भवन भोपाल, उज्जैन कालिदास महोत्सव, जबलपुर और हैदराबाद सहित देश के अनेक प्रमुख आयोजन शामिल हैं।
उन्होंने सुआ, करमा, ददरिया, पंथी, राउत नाचा, गौरा-गौरी और भोजली जैसी छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को राष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया है। इसके अलावा राजा फोकलवा, दसमत कैना, लोकमाता अहिल्या देवी, शहीद वीर नारायण सिंह, संत रविदास जी और छत्तीसगढ़ में राम जैसे नाटकों एवं प्रहसनों के माध्यम से भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी हैं।
राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार मिलने पर संस्कार भारती छत्तीसगढ़ के प्रांत महामंत्री हेमंत महुलिकर, चंद्राकर समाज के प्रदेश अध्यक्ष दाऊ दिनेश चंद्राकर, राकेश तिवारी, पद्मश्री भारती बंधु, पद्मश्री राधेश्याम बारले, पद्मश्री अनूप रंजन पांडे, डॉ. अजय मोहन सहाय, डॉ. दीनानाथ यादव सहित छत्तीसगढ़ के कलाकारों, साहित्यकारों, सांस्कृतिक संस्थाओं, शिक्षाविदों एवं नागरिकों ने हर्ष व्यक्त किया है। सभी ने डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।