राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ में दूसरे राज्यों की अवैध बाटलिंग कर शराब खपाने के पीछ अंतरराज्यीय गिरोह है। इस गिरोह का नेटवर्क अलग-अलग राज्यों तक फैला हुआ है। शराब मध्यप्रदेश से लाई जाती है तो वहीं ढक्कन, शराब बोतलों के स्टीकर और होलोग्राम दिल्ली, पुणे और नागपुर से आ रहे हैं। इन सभी लोगों के नेटवर्क एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और इसकी मदद से ही शराब के अवैध कारोबार का संगठित अपराध चलाया जा रहा है।
इस संगठित अपराध का केंद्र राजनांदगांव जिले का सरहदी इलाका डोंगरगढ़ केंद्र बना हुआ है। इस शहर को मध्यप्रदेश की शराब खपाने का सबसे बड़ा कारिडोर माना जाता है। यहां छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बालाघाट सहित कई और सरहदी जिलों से मध्यप्रदेश की शराब लाकर खपाई जाती है। पहले तो स्थानीय कोचिए इसे सीधे मध्यप्रदेश के लेबल के साथ ही बेच दिया करते थे। लेकिन पिछले तीन वर्षों में बाहरी शराब की स्थानीय बोतलों में अवैध बाटलिंग शुरु कर डबल मुनाफा कमाने का काम शुरु हुआ।
ऐसे मामलों पर अब तक तीन से अधिक कार्रवाईयां हो चुकी है। इसके बाद भी डोंगरगढ़ क्षेत्र में कहीं बड़े तो कहीं बहुत छोटे स्तर पर इस तरह का गोरखधंधा अब भी जारी है। हालही में कातलवाही में हुई कार्रवाई के बाद आबकारी और पुलिस दोनों ही विभाग इसके पीछे के नेटवर्क की जांच का दावा कर रहे हैं।