June 26, 2026


दिल्ली से सीख ली और न लखनऊ से सबक : कोचिंग संस्थानों से फायर सिस्टम गायब

प्रवेश-निकास के लिए एक ही दरवाजा

राजनांदगांव: दिल्ली और लखनऊ में कोचिंग संस्थानों हुए दर्दनाक हादसों के बीच राजनांदगांव कोचिंग संस्थान के संचालक सीख ले रहे हैं और न ही सबक। शहर में 30 से अधिक बड़े कोचिंग संस्थान संचालित हैं, ज्यादातर कोचिंग संस्थानों में फायर सिस्टम ही नहीं है। यहीं नहीं कोचिंग संस्थानों में आने जाने का रास्ता एक ही है। यदि किसी दिन बड़ी दुर्घटना होती है तो विद्यार्थियों को भागने का मौका ही नहीं मिलेगा। नईदुनिया की टीम ने गुरुवार को शहर के जय स्तंभ चौक, कमला कालेज चौक, सोनारपारा, जमातपारा, दिग्विजय कालेज रोड लालबाग, पुराना विश्राम गृह रोड व अन्य क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थानों की पड़ताल है। लालबाग स्थित कोचिंग संस्थान को छोड़ अन्य संस्थानों में आगजनी से निपटने के लिए कोई व्यवस्था नहीं पाई गई। कई कोचिंग संस्थान तंग गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थित हैं, जहां फायर ब्रिगेड वाहन का पहुंचना भी चुनौती बन सकता है। इसके बावजूद इन संस्थानों की नियमित जांच नहीं हो रही है। दिल्ली में आगजनी की घटना के बाद भी गंभीरता नहीं दिखाई। जब लखनऊ में कोचिंग संस्थान में आगजनी की घटना हुई तक प्रशासन की नींद खुली और अग्निश्मन विभाग को जांच की जिम्मेदारी दी गई।

 एक दरवाजा, संकरी सीढ़ी

  पड़ताल में सामने आया कि शहर में संचालित अधिकांश कोचिंग संस्थानों में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही दरवाजा या संकरी सीढ़ी उपलब्ध है। कई सेंटर व्यवसायिक भवनों के बजाय बहुमंजिला इमारतों और रिहायशी मकानों में संचालित हो रहे हैं, जहां आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। यदि किसी कारणवश आग लग जाए तो बड़ी संख्या में मौजूद छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद कठिन हो सकता है। शासन स्तर पर फायर सेफ्टी आडिट और सुरक्षा मानकों की समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन राजनांदगांव में स्थिति चिंताजनक नजर आ रही है। शहर के अधिकांश कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्था केवल दिखावे तक सीमित है, जबकि अग्निशमन विभाग की ओर से प्रभावी जांच और निगरानी नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की जान जोखिम में बनी हुई है।

 किराये के भवन में संचालित हो रही कोचिंग संस्थाएं

शहर में 30 से अधिक छोटे-बड़े कोचिंग संस्थाएं संचालित हो रही हैं। 90 प्रतिशत कोचिंग संस्थानों के पास खुद को भवन नहीं है। यहीं कारण है कि कोचिंग संस्थान के संचालक फायर सेफ्टी को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। बुधवार को नगर सेना व अग्निश्मन विभाग के अधिकारियों ने कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई खामियां पाई गई। कोचिंग संस्थानों में एक ही प्रवेश व निकासी गेट मिले। फायर सेफ्टी भी नहीं पाए गए। अधिकारियों ने कोचिंग संस्थानों के संचालकों से पूछा कि यदि आगजनी की घटना होगी तो विद्यार्थी कैसे भागेंगे। लेकिन संचालकों ने कोई जवाब नहीं दे पाए।

 हर कोचिंग सेंटर में इमरजेंसी एग्जिट अनिवार्य।

प्रत्येक मंजिल पर अग्निशामक यंत्र की व्यवस्था।

फायर सेंसर अलार्म और आपदा प्रबंधन योजना जरूरी।

 समय-समय पर फायर सेफ्टी आडिट अनिवार्य।

 भवन की क्षमता के अनुसार विद्यार्थियों की संख्या निर्धारित होना चाहिए।


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