July 10, 2026


टीईटी का दबाव 2028 तक पास नहीं किया तो नौकरी पर संकट

15 से 20 वर्षों से स्कूलों में बच्चों को शिक्षा दे रहे हजारों शिक्षक अब स्वयं परीक्षा की तैयारी करने को मजबूर

राजनांदगांव: करीब दो दशक से सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे अविभाजित राजनांदगांव जिले पांच हजार सहित प्रदेशभर के 80 हजार से अधिक प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षकों के सामने अब खुद परीक्षा पास करने की चुनौती खड़ी हो गई है। वर्ष तीन सितंबर 2001 से 23 अगस्त 2010 के बीच नियुक्त इन शिक्षकों को 21 अगस्त 2028 तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। समय-सीमा के भीतर टीईटी पास नहीं करने पर उनकी नौकरी पर संकट गहरा सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इनमें आधे से अधिक शिक्षक 50 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या 54-55 वर्ष की भी है। ऐसे में लंबे अंतराल के बाद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं माना जा रहा।

एक साल मिलेगा अतिरिक्त

सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट नहीं मिलेगी। पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो चुकी है। हालांकि अदालत ने राहत देते हुए टीईटी उत्तीर्ण करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 21 अगस्त 2028 कर दी है।

प्रदेश में कुल 80,491 शिक्षक इस दायरे में आते हैं। इस बीच इंटरनेट मीडिया पर टीईटी से छूट मिलने के दावे भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। शिक्षक संगठनों ने इन्हें पूरी तरह भ्रामक बताते हुए कहा है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् (एनसीटीई) के हलफनामे का गलत अर्थ निकालकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि न्यायालय का आदेश स्पष्ट है।

 उच्च स्तर के प्रश्नों ने उड़ाई नींद

शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है। टीईटी नियमित अंतराल पर आयोजित नहीं होती और कई बार दो-दो साल तक परीक्षा नहीं होती। साथ ही प्रश्नों का स्तर कई बार लोक सेवा आयोग (पीएससी) जैसा होने से अनुभवी शिक्षकों को भी कठिनाई होती है। विभाग मिशन मोड में हर तीन-चार महीने में टीईटी आयोजित करे, ताकि सभी शिक्षक समय-सीमा के भीतर परीक्षा दे सकें। सेवानिवृत्त प्राचार्य वीडी ठाकुर ने बताया कि टीईटी का उद्देश्य शिक्षकों की दक्षता जांचना होना चाहिए, न कि वर्षों का अनुभव रखने वाले शिक्षकों को छात्रों जैसी प्रतियोगी परीक्षा में बैठाकर हतोत्साहित करना। उन्होंने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षकों के लिए अलग-अलग टीईटी तथा कक्षा आधारित पाठ्यक्रम से प्रश्न पूछने चाहिए।

 सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रमुख बातें

 टीईटी शिक्षक बनने और सेवा में बने रहने की न्यूनतम अनिवार्य योग्यता है।

 जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें टीईटी पास करना अनिवार्य होगा।

 जिनकी सेवा पांच वर्ष से कम बची है, वे सेवानिवृत्ति तक कार्य कर सकेंगे, लेकिन पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा।

 टीईटी की अनिवार्यता तीन श्रेणियों के शिक्षकों पर लागू होगी, जिनमें 2001 से 2011 के बीच नियुक्त शिक्षक शामिल हैं।


Advertisement

Tranding News

Get In Touch