राजनांदगांव :- शहर की सड़कों पर अब यातायात नियमों से ज्यादा घुमंतू मवेशियों की मनमानी भारी पड़ रही है। प्रमुख चौक-चौराहों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य मार्गों तक मवेशियों का जमावड़ा वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन गया है। हालात ऐसे हैं कि ट्रैफिक सिग्नल हरा होने के बाद भी वाहन आगे नहीं बढ़ पाते। दिन में जाम और रात में दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। सुगम यातायात और सड़क सुरक्षा के लिए योजनाएं बनाने के बावजूद समस्या बरकरार है। पशुपालकों की लापरवाही और प्रभावी कार्रवाई के अभाव में शहर की रफ्तार थम रही है, वहीं राहगीरों की सुरक्षा भी दांव पर लगी है।
नगर निगम क्षेत्र में पशुपालकों से पहले शपथ पत्र लिया गया था कि वे अपने मवेशियों को खुला नहीं छोड़ेंगे। इसके बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। दूध निकालने के बाद बड़ी संख्या में मवेशियों को सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। ये मवेशी दिनभर सड़क, बाजार और चौक-चौराहों पर बैठे रहते हैं। इनके अचानक सड़क पर आने या बीच रास्ते में बैठ जाने से वाहन चालकों को बचकर निकलना पड़ता है। इससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है और यातायात भी प्रभावित होता है।
सिग्नल हरा, लेकिन रास्ता मवेशियों के हवाले
रामदरबार चौक, पोस्ट ऑफिस चौक, महावीर चौक, डा.आंबेडकर चौक, आरके नगर चौक, बसंतपुर चौक, नंदई चौक और पेंड्री-रेवाडीह चौक सहित शहर के कई प्रमुख स्थानों पर सुबह से देर रात तक मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। कई बार सिग्नल हरा होने के बावजूद वाहन चालक आगे नहीं बढ़ पाते। खासकर बड़े वाहनों को मवेशियों के बीच से निकालने में परेशानी होती है। ड्यूटी पर तैनात यातायात पुलिसकर्मी मवेशियों को हटाकर रास्ता साफ कराते हैं, लेकिन कुछ ही देर बाद वे दोबारा उसी जगह पहुंच जाते हैं। ऐसे में पुलिस की तत्काल कार्रवाई भी स्थायी समाधान साबित नहीं हो रही है।
रात में दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना
रात के समय सड़क पर बैठे मवेशी वाहन चालकों को आसानी से दिखाई नहीं देते। अचानक सामने आने या अंधेरे में सड़क पर बैठे रहने के कारण दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। इस तरह के हादसों में कई वाहन चालक गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, वहीं मवेशियों की भी मौत हुई है। राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य मार्गों पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इसके बावजूद नगर निगम, जिला प्रशासन और यातायात पुलिस के बीच समन्वित कार्रवाई का प्रभाव सड़कों पर नजर नहीं आ रहा है।
407 मवेशी पकड़े, जुर्माना सिर्फ 13,210 रुपये
घुमंतू मवेशियों पर कार्रवाई के आंकड़े भी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करते हैं। नगर निगम ने 407 मवेशियों को पकड़कर कांजी हाउस भेजा। इनके रखरखाव और चारा-पानी पर करीब दो लाख रुपये खर्च किए गए। बाद में 311 मवेशियों को छोड़ दिया गया, जबकि पशुपालकों से महज 13,210 रुपये जुर्माना वसूला जा सका। इतनी कम दंडात्मक कार्रवाई के बीच पशुपालकों पर नियमों का पालन करने का दबाव कितना प्रभावी है, यह सवाल उठ रहा है। शहरवासियों का कहना है कि केवल मवेशियों को पकड़कर कांजी हाउस भेजना पर्याप्त नहीं है। जब तक मवेशियों को खुले में छोड़ने वाले पशुपालकों पर सख्त कार्रवाई, भारी जुर्माना और नियमित संयुक्त अभियान नहीं चलाया जाएगा, तब तक सड़कों को घुमंतू मवेशियों से मुक्त कराना मुश्किल होगा।