राजनांदगांव: जरूरतमंद परिवारों के लिए राशन की व्यवस्था इन दिनों तकनीकी अड़चनों में उलझ गई है। एक ओर सेतु पोर्टल के अपग्रेडेशन के चलते करीब एक माह से नए राशन कार्ड बनाने और पुराने कार्ड में संशोधन की प्रक्रिया प्रभावित है, वहीं दूसरी ओर सर्वर डाउन रहने से पीडीएस दुकानों में खाद्यान्न वितरण की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। स्थिति यह है कि घंटों इंतजार के बाद भी कई उपभोक्ताओं की बारी नहीं आ पा रही है। जिले की 409 पीडीएस दुकानों में मौजूदा व्यवस्था के तहत प्रतिदिन मुश्किल से 600 से 700 उपभोक्ताओं को ही राशन मिल पा रहा है। इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है।
जिले में खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था भी सर्वर की तकनीकी समस्या से प्रभावित है। पीडीएस दुकानों में उपभोक्ताओं का बायोमेट्रिक सत्यापन और आनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही खाद्यान्न दिया जाता है। सर्वर की गति धीमी होने या बार-बार डाउन होने से सत्यापन में अधिक समय लग रहा है। परिणामस्वरूप दुकानों में उपभोक्ताओं की कतार लंबी हो रही है और कम संख्या में ही वितरण हो पा रहा है। मौजूदा स्थिति में जिलेभर में प्रतिदिन करीब 600 से 700 उपभोक्ताओं को ही खाद्यान्न वितरण हो पा रहा है। कई उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार करने के बाद भी सर्वर की समस्या के कारण बिना राशन लिए वापस लौटना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों से पीडीएस दुकान तक पहुंचने वाले लोगों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि उन्हें आने-जाने में समय और खर्च दोनों उठाना पड़ता है।
2.60 लाख से अधिक राशन कार्डधारी
जिले में कुल 2,60,461 राशन कार्ड दर्ज हैं। इनमें 2,35,489 बीपीएल और 24,972 एपीएल राशन कार्ड शामिल हैं। इन राशन कार्डों से जुड़े सदस्यों की कुल संख्या 8,17,067 है। इतनी बड़ी संख्या में हितग्राहियों के लिए खाद्यान्न वितरण व्यवस्था संचालित हो रही है, लेकिन सर्वर संबंधी समस्या के कारण वितरण की गति प्रभावित होने से उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं दूसरी ओर सेतु पोर्टल में तकनीकी अपग्रेडेशन का काम चलने के कारण करीब एक महीने से नए राशन कार्ड बनाने और पुराने कार्ड में जरूरी संशोधन की प्रक्रिया लगभग ठप है। आनलाइन आवेदन की सुविधा प्रभावित होने के साथ ही ऑफलाइन प्रक्रिया भी सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रही है। नगर निगम, पंचायतों और खाद्य विभाग से संबंधित कार्यालयों में लोग जरूरी दस्तावेज लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उन्हें कई बार लौटना पड़ रहा है।