June 07, 2026


शिविर में ग्रामीण रहे भूखे अधिकारियों के लिए काजू बादाम

राजनांदगांव: मोहला विकासखंड के ग्राम पिपरखार में आयोजित सुशासन तिहार के अंतिम शिविर की व्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। शिविर में शामिल लोगों ने आरोप लगाया है कि दूर-दराज से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे अनेक ग्रामीणों को भोजन तक नहीं मिला, जबकि अधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों के लिए फल, मेवे और अन्य खाद्य सामग्री की विशेष व्यवस्था की गई थी।

ग्रामीणों के अनुसार भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच कई गांवों से लोग अपनी समस्याएं लेकर शिविर में पहुंचे थे। इनके अलावा विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को सुबह से शिविर में बुला लिया गया था। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल थे। लोगों का कहना है कि घंटों इंतजार के बावजूद उन्हें भोजन उपलब्ध नहीं कराया गया।

आरोप है कि जब कुछ ग्रामीणों ने भोजन की व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली तो उन्हें बताया गया कि भोजन अधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों के लिए रखा गया है। इससे लोगों में असंतोष फैल गया। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अधिकारियों और अतिथियों के लिए रखे गए फल, काजू, किशमिश तथा अन्य खाद्य सामग्री का कुछ हिस्सा कूड़ेदान में फेंका गया। एक ओर खाद्य सामग्री के बर्बाद होने की बात सामने आई, वहीं दूसरी ओर भोजन नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। पिपरखार में आयोजित यह शिविर वन विभाग की नोडल व्यवस्था के अंतर्गत आयोजित किया गया था। अब पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं।

 भूखे तड़पना पड़ा, अधिकारी जूस पीते रहे

सुशासन तिहार में पहुंचे कुंभली निवासी गायत्री ने बताया कि मौके पर न खाना है और न ही पत्तल है। खाना अधिकारियों के लिए बना है ऐसी जानकारी खाना बनाने वालों से मिली है। राशन कार्ड हितग्राही आगेश्वरी ने कहा कि सुबह दस बजे से बिहारी खुर्द से सुशासन तिहार में पहुंची हुईं थी। सास ससुर और छोटे छोटे बच्चों को लेकर पहुंची उन्हें भी खाना नसीब नहीं हुआ भूख से तड़प रहे है। बताया गया कि खाना अधिकारियों के लिए बना है। गांव में होटल की सुविधा तो है नहीं कि कही बाहर खा लेते इस लिये भूखा मरना पड़ रहा है। सरकार को गुहार लगाते हुए कहा कि अधिकारियों के लिए खाने की व्यवस्था है तो जनता के लिए भी व्यवस्था होनी चाहिए। अधिकारियों को जूस मिल रहा है पर हमें कुछ नहीं।


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