June 09, 2026


राजनांदगांव में मानवता की मिसाल : कड़ी धूप में डेढ़ घंटे की सर्जरी डॉ तरुण रामटेके की टीम ने बचाई गौ माता और बछड़े की जान

राजनांदगांव :- सेवा ही धर्म है, इसे चरितार्थ कर दिखाया है जिला पशु चिकित्सालय राजनांदगांव की टीम ने। दोपहर तेज धूप और लू के बीच लगभग डेढ़ घंटे तक चली जटिल सर्जरी के बाद टीम ने प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गौ माता और उसके गर्भ में पल रहे बछड़े दोनों की जान बचाकर मिसाल पेश की।

अनुपम नगर के रहवासियों ने दोपहर करीब 12 बजे देखा कि मोहल्ले में एक गाय घंटों से प्रसव पीड़ा से कराह रही है। स्थानीय लोगों के द्वारा जैनम बैद को इसकी जानकारी दी। जैनम बैद ने तुरंत ही जिला पशु चिकित्सालय के प्रभारी पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. तरुण रामटेके को फोन कर पूरी जानकारी दी।

सूचना मिलते ही डॉ. रामटेके अपनी टीम के साथ बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक जांच में पता चला कि गाय को गर्भनाल टॉर्शन यानी गर्भनाल के घूम जाने की जटिल समस्या है। इस स्थिति में सामान्य प्रसव कराना असंभव था और हर बीतते मिनट के साथ गाय और बछड़े दोनों की जान खतरे में थी

डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत

मौके की नाजुकता को भांपते हुए डॉ. तरुण रामटेके ने तत्काल सिजेरियन सेक्शन करने का निर्णय लिया। 45 डिग्री की कड़ी धूप में, एक पेड़ के नीचे, बिना किसी ऑपरेशन थिएटर की सुविधा के, खुली जगह पर ही पूरी टीम ने मोर्चा संभाला।  टीम ने बेहद एहतियात और सटीकता के साथ सर्जरी शुरू की। लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस कठिन प्रक्रिया के दौरान टीम ने ब्लीडिंग को कंट्रोल करते हुए सावधानीपूर्वक बछड़े को गर्भ से बाहर निकाला। सर्जरी सफल रही और बछड़ा पूरी तरह स्वस्थ एवं जीवित पैदा हुआ। इसके बाद गाय का गर्भाशय साफ कर टांके लगाए गए।

अग्रिम उपचार और देखभाल

ऑपरेशन के बाद गौ माता को संक्रमण से बचाने हेतु एंटीबायोटिक, दर्द निवारक इंजेक्शन और डीएनएस बॉटल लगाई गई। गाय को आगे की निगरानी और देखभाल के लिए आरोग्यम केंद्र, मोहरा में शिफ्ट करने के निर्देश दिए, मां और बछड़ा दोनों स्वस्थ हैं।

टीम वर्क की सराहना

इस जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफल बनाने में डॉ. तरुण रामटेके के साथ उनकी पूरी टीम ने अहम भूमिका निभाई। टीम में बलराज चौहान, शत्रुघन यादव, पीयूष कश्यप एवं इंटर्नशिप हेतु आये छात्र-छात्राएं शामिल थे। छात्राओं ने भी इस आपातकालीन सर्जरी से व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।

स्थानीय नागरिकों और गौसेवकों ने जिला पशु चिकित्सालय की पूरी टीम की तत्परता, समर्पण और मानवीय संवेदना की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। लोगों ने कहा कि ऐसे डॉक्टर ही समाज के असली हीरो हैं। 

डॉ. तरुण रामटेके ने बताया कि समय पर सूचना मिलना और तत्काल निर्णय लेना ही इस केस की सफलता का कारण रहा। पशु चिकित्सक होने के नाते हमारी पहली प्राथमिकता पीड़ित पशु को बचाना है।



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