राजनांदगांव : पिछले तीन दिनों से जिस रेल कार्य के कारण कई यात्री ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा, वह अब सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने रसमड़ा रेलवे स्टेशन में नई गुड्स शेड लाइन शुरू कर दी है। यह केवल एक नई रेल लाइन नहीं, बल्कि दुर्ग-राजनांदगांव रेलखंड की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई महत्वपूर्ण अधोसंरचना है।
अब तक दुर्ग स्टेशन क्षेत्र में मालगाड़ियों से जुड़ी कई गतिविधियां संचालित होती थीं। इससे स्टेशन परिसर में दबाव बढ़ता था और यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए उपलब्ध स्थान भी सीमित हो जाता था। नई गुड्स शेड लाइन शुरू होने के बाद माल लदान और अनलोडिंग से जुड़े कार्यों को धीरे-धीरे रसमड़ा स्थानांतरित किया जाएगा। इससे दुर्ग स्टेशन पर जगह खाली होगी और वहां पुनर्विकास तथा यात्री सुविधाओं के विस्तार का काम तेज हो सकेगा।
नई गुड्स शेड लाइन का कमीशनिंग कार्य रिकार्ड महज 18 घंटे में जटिल तकनीकी प्रक्रिया पूरी की गई। कार्य के दौरान मात्र छह घंटे के ट्रैफिक ब्लाक में 10 प्वाइंट एवं क्रासिंग का इंसर्शन तथा दो प्वाइंट एवं क्रासिंग को हटाने का काम पूरा किया गया। इसके लिए रेलवे ट्रैक व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किए गए, नए रेल संपर्क जोड़े गए और सिग्नल व्यवस्था को नई लाइन के अनुरूप विकसित किया गया। इसके बाद नान इंटरलाकिंग का महत्वपूर्ण चरण भी केवल 12 घंटे में पूरा कर लिया गया।
इस कार्य को पूरा करने के लिए 10 से 12 जून के बीच विभिन्न चरणों में तकनीकी ब्लाक लिया गया था, जिसके कारण कुछ यात्री ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह अस्थायी व्यवस्था दीर्घकालिक रेल विकास और बेहतर परिचालन व्यवस्था के लिए आवश्यक थी। गति शक्ति यूनिट, सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग, विद्युत परियोजना संगठन तथा अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस परियोजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नई गुड्स शेड लाइन समझिए, आखिर क्या बदलेगा?
रसमड़ा में गुड्स शेड लाइन शुरू होने के बाद दुर्ग स्टेशन पर मालगाड़ियों का दबाव कम होगा। इससे स्टेशन पुनर्विकास परियोजना को गति मिलेगी और यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए अधिक स्थान उपलब्ध होगा। माल लदान और अनलोडिंग की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होने से उद्योगों को लाभ मिलेगा। साथ ही माल परिवहन क्षमता बढ़ने से रेलवे के राजस्व में वृद्धि और परिचालन व्यवस्था में सुधार की संभावना भी बढ़ेगी। औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी। उद्योगों को माल भेजने और प्राप्त करने के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी, जिससे परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम होगी।