May 04, 2026


खेल मैदान में मेला विरोध में सड़क पर खेला क्रिकेट

बगैर अनुमति मेले की तैयारी, खिलाड़ी सड़क पर उतरे, प्रशासन घिरा

राजनांदगांव: व्यावसायिक मेले के लिए म्यूनिसिपल स्कूल मैदान छीने जाने की भनक लगते ही आक्रोशित खिलाडि़यों ने रविवार को महावीर चौक में सड़क जाम कर दिया। प्रशासन के रवैये के विरोध में उन्होंने सड़क पर ही क्रिकेट खेलकर विरोध जताया। करीब एक घंटे तक यही स्थिति बनी रही। हर वर्ग से जुटे लोगों ने खेल-खिलाड़ी जिंदाबाद के नारे लगाए और खेल के मैदान में मेले के आयोजन का विरोध किया। प्रशासन ने मेला आयोजन की अनुमति न देने और सामान हटाने की बात कही जिसके बाद खिलाड़ी सड़क से हटे।

इस विरोध के बीच प्रशासन भी घिरता दिखा। दरअसल, यह बताया गया कि मैदान में मेले के आयोजन की अनुमति किसी को नहीं दी गई है। जबकि आयोजकों की ओर से कवर्धा से तीन ट्रकों में मेले की तैयारी का सामान भेजा गया था। रविवार सुबह यह सामान मैदान में खाली किए जाने की तैयारी थी। यही नहीं इंटरनेट मीडिया में आयोजक पिछले 10 दनों से ट्राइबल मेले का प्रचार भी कर रहे हैं।

गौरतलब है कि शहर के सभी आयु वर्ग के खिलाड़ी म्यूनिसिपल स्कूल और स्टेट स्कूल मैदान में प्रतिदिन खेलने के लिए जुटते हैं। बार-बार यहां प्रशासन विभिन्न प्रकार के आयोजनों की अनुमति दे देता है। पिछले कुछ सालों से इन आयोजनों को मैदानों को छोड़कर कहीं और स्थानांतरित किए जाने की मांग की जा रही है लेकिन प्रशासन इस पर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। रविवार को एक बार फिर जब ऐसी स्थिति बनी तो सारे खिलाड़ी गेंद-बल्ला लेकर बीच चौराहे पर पहुंचे और क्रिकेट खेलना शुरु किया।

 सड़क पर गड़ाए स्टंप, प्रशासन ने मानी मांग

खिलाडि़यों ने कहा कि अब खेलने की जगह में मेला लगेगा तो खेल तो सड़कों पर ही होगा। इस दौरान लगभग एक घंटा तक महावीर चौक में सड़क जाम के बीच गहमागहमी बनी रही। खिलाड़ी नारेबाजी करते रहे। सुबह प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही सीएसपी अलेक्जेंडर किरो, कोतवाली थाना प्रभारी जवानों के साथ मौके पर पहुंचे। खिलाडि़यों को समझाइश दी जाती रही लेकिन वे अड़े रहे। अंतत: तहसीलदार पीएल नाग बातचीत के लिए और स्कूल मैदान से सामान लेकर पहुंचे ट्रकों को हटाने की बात कहकर मामले को संभाला जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।

 व्यवसायिक मेला लगाने की थी तैयारी

म्यूनिसिपल स्कूल मैदान में आठ मई से ट्राइबल मेला लगाए जाने की तैयार थी जो कि 17 मई तक आयोजित होने वाला था। यह पूर्णत: व्यावसायिक था। इसमें प्रति व्यक्ति की एंट्री पर 500 रुपये तय किये गए थे। मेला शुरू होने से पहले ही इंटरनेट मीडिया में इसका प्रचार प्रसार भी शुरू कर दिया गया था। यही कारण है कि नियमित अभ्यास करने वाले युवा पहले से ही लामबंद हो गए।

 शहर से बाहर लगे मेला

मेला-मड़ई के लिए अब शहर के बाहर उपलब्ध मैदानों का इस्तेमाल किया जाना जरुरी है। शहर के भीतर मैदानों में ऐसे आयोजनों से व्यवस्था चरमरा जाती है। एक बड़ी समस्या यह भी है कि इस्तेमाल से मैदानों को काफी नुकसान होता है जिसे दुरुस्त होने में काफी वक्त लगता है। मेला के लिए शहर के बाहर मोहारा मेला स्थल और आउटर के दूसरे वार्डों में भी काफी जगह उपलब्ध है। इससे न सिर्फ शहर के भीतर ट्रेफिक व्यवस्था सुधरेगी बल्कि मैदानों को होने वाले नुकसान से भी बचा जा सकता है।


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