October 31, 2026


ठिकानों में छापे के बाद जय वैभव को साथ ले गई ईओडब्ल्यू

कवासी और हरिश लखमा से संबंधों के चलते चर्चित रहे दोनों कारोबारी जांच के दायरे में दोनों के तार शराब घोटाले से जुड़े होने की आशंका, अलग-अलग टीमों ने दी दबिश

राजनांदगांव:  आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की टीम ने शहर के कारोबारी जय बग्गा और वैभव गोलछा के आवास पर दबिश दी। दोपहर तक इनके घरों पर जांच की कार्रवाई के बाद अफसर दोनों कारोबारियों को अपने साथ लेकर रायपुर रवाना हुए। ईओडब्ल्यू की इस कार्रवाई को छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ के चर्चित शराब घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है। उक्त कार्रवाई के दौरान प्रकरणों से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं, अवैध लेन-देन एवं आर्थिक गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख, संपत्तियों की रजिस्ट्री के दस्तावेज, डिजिटल उपकरण एवं अन्य साक्ष्य संकलित किए जाने की जानकारी है।

कारोबारी जय बग्गा के लालबाग और वैभव गोलछा के सनसिटी स्थित आवास में सुबह सात बजे ईओडब्ल्यू की टीम दो-दो गाडि़यों में आ धमकी। जय बग्गा जहां होटल, आटो मोबाइल और कृषि के कारोबार से जुड़े हुए हैं। वहीं वैभव गोलछा का मुख्य कारोबारा मेटल्स और रेत खदान का रहा है। दोनों ही पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके सुपुत्र हरिश लखमा के करीबी बताए जाते हैं। जांच के दौरान घर के सभी सदस्यों, सेक्युरिटी गार्ड के मोबाईल जब्त किए गए थे। दोपहर डेढ़ बजे तक गोलछा के निवास में जांच के बाद टीम उन्हें लेकर रायपुर रवाना हुई। जबकि शाम करीब चार बजे अफसर जय बग्गा को लेकर मुख्यालय के लिए निकले।

ईओडब्ल्यू की जांच के दायरे में आए दोनों ही कारोबारियों के लखमा परिवार से संबंध शुरु से चर्चित रहे हैं। जय बग्गा के होटल रैलीज का दिसंबर 2020 और ई-बाइक बनाने वाले रैलीज मोटो के प्लांट का अगस्त, 2022 में उद्घाटन तत्कालीन मंत्री कवासी लखमा के ही हाथों हुआ था। वे राजनांदगांव दौरे के बीच रैलीज होटल में ही रुकते थे।

ऐसी आशंका है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में शराब घोटाले के पैसे का इन दोनों ही कारोबारियों के माध्यम से राजनांदगांव में करोड़ों का निवेश किया गया। इसमें डोंगरगांव तहसील और छुरिया तहसील में सैकड़ों एकड़ की कृषि भूमि की भी जानकारी सामने आती है। इस संबंध में कई बार हरिश लखमा के राजनांदगांव जिले के इन क्षेत्रों में दौरे की खबरें भी आती रहीं हैं। कुछ समय पहले ही इनसे से कुछ कृषि भूमि की बिक्री किए जाने की अपुष्ट खबरें सामने आई थी।

बहरहाल, दोनों व्यापारियों पर ईओडब्ल्यू की छापेमारी और साथ मुख्यालय ले जाए जाने के घटनाक्रम ने कई संदेह को बल दिया है। पूरे मामले में दस्तावेजों औ संबंधों की जांच के साथ निवेश और संपत्ति के बड़े रहस्य उजागर होने का अनुमान लगाया जा रहा है।\



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