राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ की लोकगाथा ''बांस गीत'' और बांस वादन की मधुर धुन को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने वाले लोककला के साधक विक्रम यादव अब हमारे बीच नहीं रहे। छह दशक से अधिक समय तक अपनी कला के जरिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाले अंतरराष्ट्रीय बांस वादक विक्रम यादव का 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से लोककला जगत में शोक की लहर है।
स्वर्गीय विक्रम यादव ने वर्ष 1971 में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रंगकर्मी हबीब तनवीर के ''नया थियेटर'' से जुड़कर अपनी कला यात्रा को नई पहचान दी। बांस, बांसुरी और बीन वादन में उनकी अद्भुत प्रतिभा ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने रायपुर, दिल्ली, भोपाल, कोलकाता, दुर्गापुर, शोलापुर, उत्तरप्रदेश, पुणे, हरियाणा, कोल्हापुर, सतारा, मुंबई और अहमदाबाद सहित देश के अनेक शहरों में अपनी प्रस्तुतियां दीं। वर्ष 2007 में रंगकर्मी अनुपरंजन पांडेय के बस्तर बैंड से जुड़ने के बाद उनकी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दायरा और व्यापक हुआ। उन्होंने विदेशों में भी छत्तीसगढ़ की लोककला का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी कला प्रस्तुत करने का गौरव भी प्राप्त हुआ।
राष्ट्रीय तुलसी सम्मान सहित मिले कई प्रतिष्ठित सम्मान
छह दशक से अधिक की कला साधना के दौरान विक्रम यादव को अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 2007 में युवा कुर्मी मित्र मंडल भिलाई ने उन्हें ''भुइयां सम्मान'' प्रदान किया। वर्ष 2018 में मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग ने प्रतिष्ठित ''राष्ट्रीय तुलसी सम्मान'' से सम्मानित किया। वर्ष 2022 में गुरुघासीदास लोककला महोत्सव ककरेल तथा भारतीय जन नाट्य संघ की ओर से भी उनका सम्मान किया गया। लोक मड़ई, मंदराजी महोत्सव, चक्रधर समारोह, अंतरराष्ट्रीय महाउर कला महोत्सव, जयपुर लोकरंग महोत्सव और नया थियेटर भोपाल जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर उनके बांस वादन की विशिष्ट पहचान रही।
आने वाली पीढ़ियों के लिए रहेंगे प्रेरणास्रोत
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए महापौर मधुसूदन यादव ने कहा कि विक्रम यादव का निधन छत्तीसगढ़ की लोककला के लिए अपूरणीय क्षति है। बांस वादन की विलुप्त होती परंपरा को उन्होंने अपनी साधना से नई पहचान दिलाई। उनकी कला साधना और लोक संस्कृति के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। गृहग्राम खैरा में आयोजित अंतिम संस्कार में महापौर मधुसूदन यादव, भाजपा अध्यक्ष कोमल राजपूत आदि प्रमुख रूप से शामिल हुए।