राजनांदगांव :- छत्तीसगढ़ में मजदूर वर्ग के हितों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में चार नए श्रम कानूनों को जारी करने की स्वीकृति मिलने से लाखों श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, रोजगार संबंधी अधिकारों और बेहतर कार्य परिस्थितियों का लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार के इस निर्णय का छत्तीसगढ़ राज्य श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त योगेश दत्त मिश्रा ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के प्रति आभार व्यक्त किया है।
श्री मिश्रा ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह निर्णय श्रमिकों के हितों की रक्षा और उन्हें सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले बड़ी संख्या में श्रमिकों को योजनाओं का लाभ दिलाने तथा उनके मूलभूत अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। चार नए श्रम कानूनों की स्वीकृति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। श्री मिश्रा ने बताया कि नए श्रम कानून प्रदेश में पहले से प्रचलित श्रम कानूनों का स्थान लेंगे। इनके प्रभावी होने के बाद श्रमिकों को रोजगार, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल से जुड़े कई महत्वपूर्ण अधिकारों का लाभ मिलने का रास्ता साफ होगा। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है। नए प्रावधानों में ग्रेच्युटी से संबंधित महत्वपूर्ण व्यवस्था बताई गई है। इसके तहत मात्र एक वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण करने पर पात्र श्रमिकों को ग्रेच्युटी का लाभ मिलने की बात कही गई है। इससे अल्प अवधि में रोजगार करने वाले श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा। श्रमिकों के हित में एक महत्वपूर्ण प्रावधान नियुक्ति पत्र को लेकर है। अब नियोक्ताओं द्वारा श्रमिकों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। इससे श्रमिकों के रोजगार की स्थिति स्पष्ट होगी और भविष्य में वेतन, सेवा शर्तों तथा अन्य अधिकारों से संबंधित विवादों में उन्हें दस्तावेजी आधार भी मिल सकेगा। नए कानूनों के तहत श्रमिकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भविष्य निधि (पीएफ) और पेंशन फंड से जुड़े प्रावधानों को मजबूत किए जाने की बात कही गई है। इससे श्रमिकों को रोजगार के बाद भी आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलेगी। मजदूरों द्वारा निर्धारित कार्य अवधि से अतिरिक्त समय काम किए जाने पर ओवरटाइम भुगतान को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत श्रमिकों को दोगुनी दर से ओवरटाइम भुगतान मिलने की बात कही गई है। साथ ही श्रमिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच और महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण के लिए भी विशेष प्रावधान किए जाने का उल्लेख है। डिलीवरी, कैब सेवा और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम करने वाले गिग वर्कर्स को भी नए श्रम कानूनों के दायरे में पहचान और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रावधान किए गए हैं। बदलते रोजगार क्षेत्र में बड़ी संख्या में युवा इस प्रकार के कार्यों से जुड़े हैं, ऐसे में यह प्रावधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। श्री मिश्रा ने बताया कि नए श्रम कानूनों में न्यूनतम वेतन को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसके तहत किसी भी श्रमिक को राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन से कम पारिश्रमिक नहीं दिए जाने की बात कही गई है। इससे कम वेतन पर श्रमिकों से काम कराने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। श्री मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय प्रदेश के मजदूर वर्ग के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को केवल रोजगार उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उनके रोजगार को सुरक्षित करना, उचित पारिश्रमिक दिलाना और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नए श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से मजदूरों को उनके अधिकारों के प्रति अधिक सुरक्षा मिलेगी और उनके सामाजिक एवं आर्थिक जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के प्रति पुनः आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय श्रमिक हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।