राजनांदगांव : जिले में सुशासन तिहार के कुल 59 शिविरों में शिकायतों के कुल 1154 आवेदन मिले हैं। इनमें से 276 आवेदनों को ही निराकृत किया जा सका है। इस मामले में ग्रामीण क्षेत्र में निराकरण का औसत महज दो प्रतिशत है। 608 आवेदनों में से 15 शिकायतों का ही समाधान किया जा सका। जबकि शहरी इलाके में यह औसत 10 प्रतिशत है। यहां पांच निकायों में कुल 546 शिकायतें मिली और 56 का निराकरण किया गया। सुशासन तिहार के 40 दिन की अवधि में भी शिकायतों के समाधान नहीं खोजे जा सके। इधर, इन शिविरों में मांग के बंफर आवेदन आए हैं। ऐसे कुल 33003 आवेदन मिले हैं जिनमें से 13,045 का निराकरण किया जा सका है।
जिला प्रशासन ने सुशासन तिहार के लिए कुल 62 क्लस्टर बनाए थे। इनमें ग्रामीण क्षेत्र 27 और शहरी में 45 क्लस्टर शामिल थे। हालांकि नगर पंचायत घुमका में चुनाव और लखोली में एक शिविर कैंसल किया गया। इस तरह ग्रामीण और शहरी को मिलकार कुल 59 शिविरों को आयोजन किया गया था। शिविर समाप्त होने के बाद प्रशासन के पास निराकरण के लिए मांग के 19958 और शिकायत के 878 आवेदन शेष हैं। इन आवेदनों के जल्द निराकरण के निर्देश दिए गए हैं।
चिटफंड के पैसे दिलाने, परिवारिक विवाद तक की शिकायत पहुंची
सुशासन तिहार के दौरान कई शिकायतों पर अधिकारी भी चकरा गए। नगर निगम राजनांदगांव में सुशासन तिहार के शिविर के दौरान 28 मई को लखोली में आयोजित शिविर के दौरान एक युवक अपने स्वजनों से विवाद की शिकायत लेकर पहुंच गया। उसने पारिवारिक विवाद को सुलझाने और अपने स्वजनों की शिकायत सौंप दी। अधिकारियों ने उसे काफी समझा बुझाकर रवाना किया। इसी तरह एक अन्य शिविर के दौरान कुछ नागरिक सहारा इंडिया में किए गए निवेश की राशि वापस दिलाने की मांग लेकर पहुंच गए।
आवेदनों की छंटनी में हो रही माथापच्ची
शिविरों में मिले आवेदनों की छंटनी में भी विभागों को काफी माथापच्ची करनी पड़ रही है। कई मामलों में मूल विभाग की शिकायतें दूसरे विभागों को भेज दी गई है। एक और समस्या दोहरी आइडी को लेकर भी सामने आई है। मसलन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नाम पर दो आइडी दर्ज हैं। दरअसल, मार्कफेड की आइडी भी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नाम से ही बना दी गई है। इन तकनीकी समस्याओं को सुलझाने में भी काफी वक्त लग रहा है।