किरंदुल। श्री राघव मंदिर में जन्माष्टमी महोत्सव का सबसे मनोहारी क्षण तब आया, जब नन्हे-मुन्ने बच्चे कृष्ण और राधा के रूप में मंच पर उतरे।
"बाल कृष्ण, राधा रानी स्वरूप एवं सनातन वेशभूषा प्रस्तुति" महोत्सव में 5 से 7 साल के बच्चों ने मोर मुकुट, पीतांबर, मुरली और रंग-बिरंगी घाघरा-चोली धारण कर बाल गोपाल, राधा रानी, यशोदा मैया, बलराम और सुदामा के जीवंत स्वरूपों की प्रस्तुति दी।
नन्हे कान्हा की किलकारियों और राधा रानी की मनमोहक मुस्कान ने ऐसा समां बांधा कि पूरा मंदिर प्रांगण "राधे-राधे" के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए, मानो गोकुल-वृंदावन की अनुपम छटा किरंदुल में ही उतर आई हो।
कार्यक्रम के अंत में श्री राम जन कल्याण सेवा समिति एवं गायत्री परिवार द्वारा सभी प्रतिभागी बच्चों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया गया।