May 26, 2026


न डाग कैचर और न ही घुमंतू पागल कुत्तों का रिकार्ड

चुनौतियां: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ीं चुनौतियां, लेकिन नहीं है कोई व्यवस्था


राजनांदगांव: शहर में घुमंतू और पागल कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी अब भी आंख मूंदे बैठे हैं। हालत यह है कि शहर के लगभग हर वार्ड में घुमंतू कुत्तों का झुंड खुलेआम घूम रहा है और राह चलते लोगों, बच्चों व बुजुर्गों पर हमला कर उन्हें घायल कर रहा है। डाग बाइट की घटनाएं लगातार सामने आने के बावजूद नगर निगम प्रशासन ने अब तक कोई ठोस व्यवस्था खड़ी नहीं की है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि करोड़ों का बजट खर्च करने वाले नगर निगम के पास न तो डाग कैचर टीम है और न ही शहर में मौजूद घुमंतू कुत्तों का कोई आधिकारिक रिकार्ड। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर निगम प्रशासन किस आधार पर शहर की व्यवस्था संभालने का दावा कर रहा है। इधर, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नई चुनौतियां सामने आ गई हैं। कोर्ट ने कहा है कि रेबीज संक्रमित और गंभीर रूप से बीमार कुत्तों को मारने के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

कुत्तों कर रहे शिकार, अधिकारी करते हैं टालमटोल

शहर के वार्डों में सुबह और रात के समय घुमंतू कुत्तों का झुंड लोगों का रास्ता रोक लेता है। कोचिंग जाने वाले बच्चों और काम पर निकलने वाले लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। कई लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो चुके हैं, लेकिन शिकायतों के बाद भी निगम के अधिकारी केवल आश्वासन देकर मामला टाल देते हैं। निगम कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने पहुंचने वाले लोगों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई टीम उपलब्ध नहीं है। इससे साफ जाहिर होता है कि निगम प्रशासन ने इस गंभीर समस्या को लेकर कोई तैयारी ही नहीं की है।

 बधियाकरण कागजों में सिमटा

अन्य शहरों में डाग कैचर वाहन, विशेष टीम और नसबंदी अभियान चलाए जाते हैं, वहीं राजनांदगांव में जिम्मेदार अधिकारी फाइलों तक सीमित नजर आ रहे हैं। करीब 2000 कुत्तों का बधियाकरण करने का लक्ष्य रखा गया था। केवल 1300 कुत्तों को ही बधियाकरण हो पाया है। यदि समय रहते आवारा कुत्तों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह हो सकते हैं। नगर निगम द्वारा घुमंतू कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए हर वार्ड में एक फीडिंग पाइंट बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई थी। उद्देश्य यह था कि तय स्थानों पर कुत्तों को भोजन उपलब्ध कराया जाए, जिससे वे इधर-उधर भटककर लोगों पर हमला न करें। लेकिन यह योजना कागजों से बाहर नहीं निकल सकी।


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