राजनांदगांव : जिले के सोमनी थाना क्षेत्र में 14 वर्षीय नाबालिग को कथित रूप से गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर गर्भवती घोषित करने और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। जिला साहू संघ के अध्यक्ष भागवत साहू ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे सिस्टम की बड़ी नाकामी बताया और दोषी डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों एवं संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जिले के सोमनी थाना क्षेत्र में सामने आई एक संवेदनशील घटना ने स्वास्थ्य और पुलिस व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार एक 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची को स्थानीय अस्पताल द्वारा प्रारंभिक जांच में गर्भवती बताया गया। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने बच्ची को थाने ले जाकर पूछताछ की और कथित रूप से रातभर मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। बाद में जब अलग-अलग स्तर पर दोबारा जांच कराई गई तो यह सामने आया कि नाबालिग गर्भवती नहीं थी। इस खुलासे के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया और स्वास्थ्य तंत्र व पुलिस प्रक्रिया की गंभीर खामियां उजागर हुईं। जिला साहू संघ के अध्यक्ष भागवत साहू ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि एक गलत मेडिकल रिपोर्ट ने न केवल बच्ची के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई बल्कि उसके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी नाबालिग और उसके परिवार के साथ इस तरह की स्थिति उत्पन्न होना बेहद चिंताजनक है। श्री साहू ने मांग की कि गलत रिपोर्ट तैयार करने वाले डॉक्टर, मामले में संवेदनशीलता नहीं बरतने वाले पुलिस अधिकारी, महिला पुलिसकर्मी और अन्य संबंधित दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सही प्रक्रिया अपनाई जाती तो बच्ची और उसके परिवार को मानसिक पीड़ा से बचाया जा सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मेडिकल जांच प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई के दौरान विशेष दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। साथ ही नाबालिगों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।