May 26, 2026


धान घोटाला में जांच के दायरे में 24 समितियां

राजनांदगांव: जिले की 96 में से 27 सहकारी समितियां धान खरीदी में गड़बड़ी को लेकर कार्रवाई के दायरे में है। इनमें से दो मामलों में समितियों के स्टाफ और प्राधिकृत अधिकारी पर एफआइआर दर्ज हो भी चुकी है, जबकि एक के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई जारी है। जिला प्रशासन लगातार इनकी निगरानी कर रहा है। अन्य 24 समितियों के प्रबंधकों, कंप्यूटर आपरेटरों के साथ ही प्राधिकृत अधिकारी पर भी गबड़बड़ी पर गाज गिर सकती है। प्रशासन के अनुसार, इन सभी केंद्रों में अब भी उठाव जारी है। किसी भी तरह की घपलेबाजी सामने आने पर कार्रवाई संभावित है। खाद्य अधिकारी ने कहा कि जिन समितियों के खिलाफ जांच जारी है उन्हें भी लेकर जल्द निर्णय कर लिया जाएगा।

बीते वर्ष तक राजनांदगांव जिले की समितियों में प्रति वर्ष सूखत या शार्टेज की मात्रा कही ज्यादा रही है लेकिन इस बार प्रशासन ने खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही इस पर नियंत्रण के लिए योजना बनाकर काम शुरु कर दिया था। उपार्जन केंद्रों में संग्रहण और उठाव के लिए नए सिस्टम तैयार किए गए। रियल टाईम मानिटरिंग और समितियों का भौतिक सत्यापन कराया गया। इसमें ही कई गड़बडि़यां मिली जिन पर 13 समितियों के खिलाफ जांच शुरु की गई। गौरतलब है कि वर्ष 2024-25 के खरीफ सीजन में की गई खरीदी के बाद सहकारी समितियों के उपार्जन केंद्रों से 27 करोड़ 43 लाख 58 हजार रुपये का धान गायब मिला था।

 27 समितियों में 40 हजार क्विंटल का घपला

जिन समितियों में धान का उठाव अधिक शेष होने के बाद भी संग्रहण में कमी नजर आ रही है उन केंद्रों के प्रबंधकों और कंप्यूटर आपरेटरों की लगातार बैठकें ली जा रही है। इनमें से 27 केंद्रों को अधिक संवेदनशील केंद्र के तौर पर चिन्हित किया गया है। इन समितियों में ही कुल 40,328.13 क्विंटल धान की हेराफेरी सामने आ रही है। बताया जाता है कि बैठकों में प्रबंधकों को सीधी नसीहत दी गई है। कलेक्टर जितेंदर यादव खुद ही पूरे प्रकरण की मानिटरिंग कर रहे हैं और प्रतिदिन इससे जुड़े अपडेट लिए जा रहे हैं।

0 करोड़ों के गोलमाल में नकेल

धान खरीदी, उठाव को लेकर की गई कड़ाई ने प्रबंधकों को सकते में ला दिया है। दस्तावेजों में कई समितियों में 2200 क्विंटल धान अब भी संग्रहित दिख रहा है जबकि केंद्रों में स्टाक है ही नहीं। इतनी बड़ी मात्रा में सूखत भी संभव नहीं है। पिछले साल तक प्रबंधक इसे सूखत या विभिन्न तरह के नुकसान बताकर पल्ला झाड़ लेते थे और इस आड़ में करोड़ों का खेल होता था। लेकिन इस बार प्रशासन खरीदी के समय से ही इसकी निगरानी शुरु दी। अब प्रबंधकों पर लाखों की रिकवरी या फिर एफआइआर की तलवार लटक रह है।

 इन समितियों पर हुई कार्रवाई

कुहीकला समिति : 2039 क्विंटल यानी लगभग 63 लाख रुपये का धान समिति से गायब मिला। प्रशासन ने समिति प्रबंधक हरिनारायण रामटेके, कंप्यूटर आपरेटर धनेश्वर बंकर और प्राधिकृत अधिकारी रामकुमार मंडावी के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात का प्रकरण दर्ज कराया है। मोहारा समिति : समिति में सूखत बताने के बाद कम डिलीवरी की गई। जबकि इसके बाद केंद्र से 995.68 क्विंटल यानी लगभग 30 लाख रुपये की अफरा-तफरी पकड़ी गई। मामले में केंद्र प्रभारी संतोष वर्मा, कंप्यूटर आपरेटर वेद प्रकाश साहू व परिवहन कर रहे राजू वर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। बागरेकसा समिति : डोंगरगढ़ विकासखंड के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बागरेकसा में 52 लाख 57 हजार 786 रूपए मूल्य के कुल 1696.06 क्विंटल धान का गबन पाया गया है। दोषी समिति प्रबंधक नीलकंठ साहू, आपरेटर ओम कुमार यादव एवं अन्य कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


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