August 25, 2026


“जिस भवन का बोया था बीज, उसी का काटा फल”: डॉ शिवकुमार डहरिया ने किया 6.50 लाख के पटेल भवन का लोकार्पण

विपक्ष में रहकर भी डॉ. डहरिया की मजबूत पकड़ बरकरार, बनरसी में सामाजिक कार्यक्रम बना जनसंपर्क और राजनीतिक चर्चा का केंद्र

रामकुमार गुप्ता आरंग :  आरंग विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बनरसी स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर एवं बड़े तालाब परिसर में नवनिर्मित पटेल समाज भवन के लोकार्पण समारोह ने क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दे दी है। करीब 6 लाख 50 हजार रुपये की लागत से निर्मित पटेल भवन का विधिवत लोकार्पण पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व विधायक डॉ. शिवकुमार डहरिया ने किया।

इस अवसर पर डॉ. डहरिया ने ऐतिहासिक शिव मंदिर में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम में पटेल समाज के पदाधिकारियों, ग्रामीणों और विभिन्न वर्गों के लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही।

“जिस भवन का बोया था बीज, उसी का काटा फल”

लोकार्पण समारोह का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि इस पटेल भवन की आधारशिला भी डॉ. शिवकुमार डहरिया के मंत्री एवं विधायक कार्यकाल के दौरान रखी गई थी। पटेल समाज की मांग पर उन्होंने भवन निर्माण के लिए 6 लाख 50 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान कराई थी तथा भूमिपूजन भी कराया था।

अब भवन निर्माण पूर्ण होने के बाद पटेल समाज के पदाधिकारियों ने उसी जनप्रतिनिधि को लोकार्पण के लिए मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया, जिनके कार्यकाल में इस भवन की परिकल्पना को स्वीकृति मिली थी। इसी संदर्भ में समारोह के दौरान यह बात चर्चा में रही कि “जिस भवन का बोया था बीज, उसी का काटा फल।”

विपक्ष में रहकर भी जनता से सीधा जुड़ाव

डॉ. शिवकुमार डहरिया वर्तमान में सत्ता से बाहर होने के बावजूद आरंग विधानसभा क्षेत्र में लगातार सामाजिक, धार्मिक और जनसरोकार से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी निरंतर मौजूदगी और लोगों से सीधा संवाद उनके जनाधार को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

बनरसी के इस आयोजन में उनकी सक्रिय भूमिका के बाद क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का मानना है कि सत्ता में नहीं रहने के बावजूद डॉ. डहरिया की सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता लगातार बनी हुई है और क्षेत्र के विभिन्न समाजों के साथ उनका जुड़ाव मजबूत दिखाई देता है।

वर्तमान विधायक को आमंत्रण नहीं मिलने पर उठे सवाल

लोकार्पण समारोह को लेकर राजनीतिक चर्चा का एक बड़ा कारण वर्तमान विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब को आमंत्रित नहीं किया जाना भी रहा। स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।

हालांकि यह आयोजन पटेल समाज द्वारा आयोजित किया गया था, लेकिन भवन के निर्माण की स्वीकृति और भूमिपूजन से डॉ. डहरिया के जुड़े होने के कारण समाज द्वारा उन्हें लोकार्पण के लिए आमंत्रित किया जाना पूरे कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बना रहा।

बड़ी संख्या में पहुंचे समाजजन और ग्रामीण

कार्यक्रम में पटेल समाज के अध्यक्ष गोपाल पटेल, उपाध्यक्ष पवन पटेल, सचिव नंदकुमार पटेल, कोषाध्यक्ष मोहन पटेल, ग्राम पंचायत बनरसी की सरपंच सुशीला ध्रुव, उपसरपंच संतोष पटेल, राज-पार प्रमुख वेदप्रकाश पटेल, कृष्णा पटेल, फनेश्वर पटेल, जगदीश पटेल, नोहर पटेल, ईश्वर पटेल, बलराम पटेल, पंचुराम पटेल, तुलसीराम पटेल, बाबूलाल पटेल, नीरा पटेल, सेवती पटेल, रेखा पटेल, प्रमिला देवी पटेल सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

इसके अलावा धन्ना लाल साहू (मंडल अध्यक्ष), रूपेश कुमार साहू (सेक्टर अध्यक्ष), खेलू राम साहू (पूर्व सरपंच), अवध राम साहू, रामानंद साहू, भागुराम कन्नौजे, खिलावन धीवर, गौतम साहू, रमेश कुमार साहू, पुनीत जांगड़े, पुनीत टंडन, प्रेमलाल साहू, बुधेलाल लहरी, अंजू साहू, काजल साहू, उर्वशी साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे।

सामाजिक आयोजन के साथ राजनीतिक चर्चा भी तेज

पटेल भवन का लोकार्पण भले ही सामाजिक उद्देश्य से आयोजित किया गया, लेकिन डॉ. शिवकुमार डहरिया की मुख्य भूमिका और बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने इसे क्षेत्र की राजनीतिक चर्चा का भी केंद्र बना दिया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि आरंग क्षेत्र में डॉ. डहरिया की सामाजिक सक्रियता और जनसंपर्क अभी भी प्रभावशाली है।

ग्रामीणों और समाजजनों ने कहा कि भवन निर्माण की स्वीकृति से लेकर उसके पूर्ण होने तक डॉ. डहरिया की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में उन्हीं के हाथों भवन का लोकार्पण होना समाज के लिए विशेष अवसर रहा।

बनरसी में पटेल समाज भवन का लोकार्पण केवल एक भवन के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने आरंग विधानसभा क्षेत्र की बदलती राजनीतिक गतिविधियों और जनसंपर्क की नई चर्चाओं को भी जन्म दे दिया है।



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