रामकुमार गुप्ता आरंग : जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में जिला पंचायत सदस्य वतन अंगनाथ चन्द्राकर ने एक के बाद एक जनहित से जुड़े मुद्दे उठाते हुए विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। पीएमजीएसवाई और पीडब्ल्यूडी की जर्जर सड़कों से लेकर धान खरीदी, फसल बीमा, गौधाम योजना, आंगनबाड़ियों, शासकीय भूमि के हस्तांतरण, स्कूल प्रबंधन समितियों तथा अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के कार्यों के भुगतान में देरी जैसे मुद्दों पर उन्होंने अधिकारियों से जवाब मांगा। सवालों के दौरान कई मामलों में अधिकारी स्पष्ट जवाब देने के बजाय जिम्मेदारी एक-दूसरे के विभाग पर डालते नजर आए।
बैठक में वतन चन्द्राकर ने पीएमजीएसवाई और पीडब्ल्यूडी की सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि निर्माण के बाद कई सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सड़कों के रखरखाव और समय पर मरम्मत के लिए विभागीय जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उनका कहना था कि सड़क निर्माण के बाद उसके रखरखाव की जिम्मेदारी से विभाग बच नहीं सकता।
धान खरीदी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने संयुक्त खातेदार किसानों के लिए एग्रीटेक पंजीयन की अनिवार्यता का विरोध किया। उन्होंने कहा कि किसानों को धान बेचने से पहले अनावश्यक कागजी प्रक्रिया में उलझाने के बजाय पंजीयन और खरीदी की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
फसल बीमा योजना को लेकर भी उन्होंने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। वतन ने कहा कि फसल नुकसान का वास्तविक आकलन किसान को इकाई मानकर किया जाना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में जिला इकाई होने के कारण वास्तविक रूप से नुकसान उठाने वाले कई किसानों को बीमा राशि का लाभ नहीं मिल पाता। दूसरी ओर किसानों के खातों से नियमित रूप से बीमा प्रीमियम की राशि काटी जाती है। उन्होंने सवाल किया कि जब किसान से बीमा की राशि ली जा रही है तो नुकसान होने पर उसे उचित राहत क्यों नहीं मिल रही।
गौधाम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि जिले में योजना का अपेक्षित लाभ धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। आवारा मवेशियों से फसलों को बचाने के लिए किसानों को लगातार परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि आवारा मवेशियों के कारण होने वाले फसल नुकसान की समस्या के स्थायी समाधान के लिए गौधाम योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।
जर्जर आंगनबाड़ियों के मरम्मत कार्य में देरी का मुद्दा भी बैठक में उठा। वतन ने बताया कि मरम्मत कार्य के लिए करीब सात माह पहले ही राशि का आवंटन हो चुका है, इसके बावजूद अब तक टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। उन्होंने सवाल किया कि राशि उपलब्ध होने के बावजूद कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है। बच्चों से जुड़े बुनियादी सुविधाओं के कार्यों में इस तरह की देरी पर उन्होंने जवाबदेही तय करने की मांग की।
वतन चन्द्राकर ने कलेक्टर रायपुर द्वारा ग्राम पंचायतों की अनुमति के बिना शासकीय भूमि को उद्योग विभाग में स्थानांतरित कर उद्योगपतियों को आवंटित किए जाने के मामले पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों से जुड़े शासकीय भूमि के मामलों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायतों की भूमिका एवं अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी और जवाबदेही तय करने की मांग की।
स्कूल शिक्षा विभाग की स्कूल प्रबंधन समितियों को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बच्चों के पालकों को समिति में अध्यक्ष एवं संचालन मंडल के गठन को लेकर निर्देश जारी किए जाने के बावजूद कई स्कूलों में पुरानी समितियां भंग नहीं की गई हैं। उन्होंने निर्देशों के अनुरूप समितियों का गठन सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि स्कूलों के संचालन में पालकों की प्रभावी भागीदारी हो सके।
इसी तरह अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण से स्वीकृत एवं पूर्ण हो चुके कार्यों की राशि का सरपंचों को भुगतान नहीं होने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया। उन्होंने कहा कि पंचायतों के माध्यम से कार्य पूर्ण करा लिए जाते हैं, लेकिन भुगतान के लिए सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों को भटकना पड़ता है। काम पूरा होने के बाद भी भुगतान में देरी को उन्होंने व्यवस्था की गंभीर खामी बताते हुए लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की।
बैठक में वतन चन्द्राकर द्वारा लगातार जनहित के मुद्दे उठाए जाने के दौरान अधिकारियों से जवाब मांगा गया। कई मामलों में स्पष्ट जवाब देने के बजाय जिम्मेदारी एक-दूसरे के पाले में डालने की स्थिति दिखाई दी। इससे बैठक में यह सवाल भी सामने आया कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों पर जवाबदेही आखिर किस विभाग की है।
वतन चन्द्राकर ने कहा कि जनहित के मुद्दे केवल बैठक की कार्यवाही तक सीमित नहीं रहने चाहिए। संबंधित विभागों को प्रत्येक मामले में ठोस कार्रवाई करते हुए उसकी समयसीमा निर्धारित करनी चाहिए। उन्होंने सड़क, किसान, शिक्षा, पंचायत और ग्रामीण विकास से जुड़े सभी मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने की मांग की।