राजनांदगांव: खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर ने कहा कि किसी भी धर्म या व्यक्ति की अवमानना करने का अधिकार किसी को नहीं है। जिस विषय का ज्ञान न हो, उस पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म का अपमान नहीं करना चाहिए और समझ न आने वाली बात को पहले समझने का प्रयास करना चाहिए।
जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में श्रेयांशप्रभ सागर ने कहा कि दूसरे धर्मों के साधु-संतों ने भी मोक्ष प्राप्त किया है। इसलिए अपने ज्ञान को लेकर अहंकार नहीं करना चाहिए। ज्ञानी व्यक्ति स्वयं को ज्ञानी नहीं बताता। इसी तरह त्यागी को अपने त्याग का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। ज्ञान और त्याग कोई ऐसी डिग्री नहीं हैं, जिनका प्रदर्शन किया जाए।
गुणी व्यक्ति नहीं करता दिखावा
उन्होंने कहा कि जहां आवश्यकता हो, वहीं बोलना चाहिए। गुणी व्यक्ति दिखावा नहीं करता। बिना मांगे दी गई सलाह का भी कोई विशेष मूल्य नहीं होता। उन्होंने कहा कि किसी धर्म के बारे में जानकारी न हो तो उसके संबंध में टिप्पणी करने के बजाय उसे समझने का प्रयास करना चाहिए।
सत्य अपनी जगह अडिग रहता है
श्रेयांशप्रभ सागर ने कहा कि सत्य कभी बदलता नहीं है। किसी के मानने या न मानने से सत्य की प्रकृति नहीं बदलती। उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुत कुछ ऐसा हो सकता है, जिसे मनुष्य ने अभी तक नहीं देखा है। इसलिए किसी वस्तु या घटना के बारे में यह नहीं कहना चाहिए कि वह दुनिया में है ही नहीं। बेहतर है कि कहा जाए कि मैंने ऐसी चीज अब तक नहीं देखी है। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।