राजनांदगांव : गतिशिक्ति योजना के तहत तैयार और जून में लोकार्पित 26 करोड़ रुपये के रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच सड़क में दरार की जांच डेढ़ महीने में भी इंचभर आगे नहीं बढ़ पाई है। स्वयं नागपुर रेलवे मंडल के डीआरएम दीपक गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान ठेकेदार फर्म और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का दावा उन्होंने किया था। लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट न मिलने का हवाला देते हुए रेलवे कार्रवाई से पीछे हट रहा है। यह इस लिए भी संगीन है कि मामले की शिकायत विधानसभा अध्यक्ष और सांसद संतोष पांडे ने भी की थी। एप्रोच सड़क में 100 मीटर से भी लंबी, पांच से सात फीट गहरी और चौड़ी दरारों ने भाजपा सरकार के विकास के एजेंडे की छवि को नुकसान पहुंचाया था। इसलिए भी मामले में नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई थी।
इस मामले की जांच सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआइ ) और नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (एनआइटी) कर रही है। दोनों दिग्गज संस्थानों द्वारा की जा रही स्वतंत्र जांच की रिपोर्ट में लग रहा समय भी जांच प्रभावित कर रहा है। ऊपर से अब तक जांच रिपोर्ट के लिए रेलवे ने दोनों इंस्टीट्यूट को कोई रिमाईंडर लेटर नहीं लिखा है। इससे रेलवे प्रशासन की कार्रवाई की इच्छाशक्ति पर भी सवाल खड़े होते हैं। पिछले डेढ़ माह से मामले में जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा ही हो रही है। जबकि यह प्रकरण अमानक और गुणवत्ताहीन निर्माण को लेकर कड़ी कार्रवाई के दायरे में है।
डायरेक्टर ने खामी मानी, फिर भी नोटिस तक नहीं -
पांच जुलाई को ग्राम बरगा स्थित ओवरब्रिज की एप्रोच रोड दरक गई। सड़क का आधा हिस्सा दरार से दो टुकड़ों में बंट गया। छह जुलाई को मौके पर पुणे की घई कंस्ट्रक्शन के डायरेक्टर राजिंदर घई ने माना कि सड़क के बेस में पानी घुसने से दरार आई और यह बढ़ती जा रही है। गतिशक्ति योजना के डिवीजनल असिस्टेंट इंजीनियर मिथलेश कुमार ने भी कहा कि फिलहाल कंक्रीट डाली जा रही है लेकिन इससे नुकसान की भरपाई नहीं होगी। इसे दोबारा बनाना होगा। खामियां मानने के बाद भी रेलवे ने ठेकेदार फर्म को छुट दी और अब तक उन्हें एक नोटिस तक नहीं दिया गया।
नेताओं की साख दांव पर
इस मामले में दिग्गज नेताओं की साख दांव पर है। विधानसभा अध्यक्ष डा रमन सिंह ने अमानक निर्माण पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कड़े शब्दों में रेलवे प्रशासन की निंदा करते हुए निर्माण में भ्रष्टाचार की आशंका पर प्रबंधन को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था। सांसद संतोष पांडे ने भी मामला रेलवे मंत्री तक पहुंचाते हुए इस पर कार्रवाई मांगी थी। जिला प्रशासन ने भी रेलवे से उच्चस्तरीय जांच की मांग की। लेकिन रेलवे प्रबंधन जांच रिपोर्ट के नाम पर इन शिकायतों को भी दबाए बैठा है।
और भी कई पुलों का निर्माण कर रही फर्म
बताया जाता है कि घई कंस्ट्रक्शन को और कई ओवरब्रिज निर्माण के कार्य मिले हुए हैं जो कि प्रगतिरत हैं। ग्राम बरगा में लापरवाही के बाद इन निर्माण को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यही नहीं घई कंस्ट्रक्शन पर निर्माण के लिए अवैध उत्खनन के भी आरोप हैं जिस पर उन्हें जुर्माना भी लगाया गया है। इन सभी मामलों के बाद भी अब तक कंस्ट्रक्शन कंपनी की कोई जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।