August 22, 2026


छोटे भाई और पिता को आजीवन कारावास

टंगिया से किए प्राणघातक वार, हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने में पिता ने दिया साथ

राजनांदगांव: बड़े भाई की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने छोटे भाई और उसके पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने हत्या के साक्ष्य छिपाने के मामले में भी दोनों को दोषी पाया। प्रकरण में आरोपित मां की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है। न्यायालय ने 20 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार होता ने हत्या के बिजेतला निवासी आरोपित बालमुकुंद निर्मलकर (24) और उसके पिता मनहरण निर्मलकर (53) को आइपीसी की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साक्ष्य छिपाने के मामले में दोनों को धारा 201 के तहत भी तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। फैसले में दोनों सजाएं साथ चलने का उल्लेख है।

विवाद के बाद छोटे भाई ने की हत्या

अभियोजन के अनुसार, घुमका थाना क्षेत्र के ग्राम बिजेतला निवासी मृतक देवप्रकाश निर्मलकर का अपने छोटे भाई बालमुकुंद, पिता मनहरण और मां मीना के साथ आए दिन विवाद होता था। पारिवारिक विवाद और मारपीट से देवप्रकाश, उसकी मां और भाई परेशान रहते थे। इसी विवाद के चलते 15 मई 2024 की रात करीब 12 बजे आरोपितों ने देवप्रकाश की हत्या की योजना बनाई। अभियोजन के मुताबिक, बालमुकुंद ने घर में रखी टंगिया से देवप्रकाश के सिर और गर्दन पर प्राणघातक वार किए। हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए पिता मनहरण ने भी उसका साथ दिया। आरोपितों ने शव को बोरे में भरकर ठिकाने लगाने का प्रयास किया और घटना के समय पहने कपड़े तथा अन्य सामान को भी नष्ट करने की कोशिश की।

 गांव में चर्चा से खुला हत्या का मामला

घटना के बाद देवप्रकाश के लापता होने की जानकारी सामने आने पर ग्रामीणों में चर्चा शुरू हुई। 17 मई 2024 को ग्राम बिजेतला निवासी सूरज कोसरे के माध्यम से थाना घुमका को घटना की सूचना मिली। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों के विरुद्ध हत्या, साक्ष्य छिपाने और अन्य संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया। अभियोजन की ओर से जिला लोक अभियोजक राजेंद्र खांडेकर ने न्यायालय में पक्ष रखा।



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