राजनांदगांव: अंतरराष्ट्रीय हाकी मैदान में नया एस्ट्रोटर्फ लगाने की योजना राशि की स्वीकृति के बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। पिछले लगभग एक साल से एस्ट्रोटर्फ लगाने की प्रक्रिया कागजों में ही घूम रही है। लोक निर्माण विभाग की टेंडर प्रक्रिया में लगातार देरी के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इससे खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में निराशा बढ़ रही है।
नए एस्ट्रोटर्फ के लिए राज्य स्तर से टेंडर प्रक्रिया कराई गई है, जिसमें तीन फर्मों के नाम सामने आए हैं। इनमें कोलकाता की एक फर्म सहित अन्य कंपनियां शामिल हैं। नियमानुसार इन फर्मों में से चयन किया जाना है, लेकिन प्रक्रिया अब तक अंतिम चरण तक नहीं पहुंची है। इस बीच खेल प्रेमियों में टेंडर को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी हैं। उनका आरोप है कि प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है और पसंदीदा फर्म को काम देने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वर्ष 2013 में करीब 21 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय स्तर के हाकी मैदान का निर्माण कराया गया था। यहां एस्ट्रोटर्फ सहित अन्य सुविधाएं विकसित कर अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों की शुरुआत हुई थी। करीब एक दशक से अधिक समय बीतने के बाद टर्फ अब पुराना हो चुका है। जगह-जगह मिट्टी जमने और सतह खराब होने के कारण खिलाड़ियों के फिसलने का खतरा बना रहता है। ऐसे में नए एस्ट्रोटर्फ की मांग लगातार उठती रही है। मैदान में रखरखाव की कमी भी साफ नजर आ रही है। पवेलियन की ओर लगाई गई कई कुर्सियां टूटने लगी हैं। लंबे समय से मरम्मत और रखरखाव नहीं होने के कारण इनकी स्थिति खराब हो गई है। आगामी टूर्नामेंट के दौरान दर्शकों के लिए नई कुर्सियों की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। वहीं एस्ट्रोटर्फ पर जगह-जगह काली मिट्टी जमा हो गई है। आसपास संचालित कारखानों से उड़कर आने वाली मिट्टी के मैदान में जमने की बात कही जा रही है।
नौ करोड़ का प्रस्ताव, फ्लड लाइट को अब भी मंजूरी का इंतजार
फ्लड लाइट सहित अन्य विकास कार्यों के लिए करीब नौ करोड़ रुपये का प्रस्ताव विधानसभा चुनाव से पहले राज्य शासन को भेजा गया था, लेकिन इसकी स्वीकृति अब तक नहीं मिली है। पिछले वर्ष विधानसभा अध्यक्ष डा.रमन सिंह ने एस्ट्रोटर्फ और फ्लड लाइट की घोषणा की थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने सर्वे कर प्रस्ताव तैयार किया था। खेल प्रेमियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से विकसित मैदान को बेहतर स्थिति में बनाए रखने के लिए स्थायी रखरखाव व्यवस्था जरूरी है।