November 03, 2026


नेताओं की सुरक्षा की समीक्षा कर रहा खुफिया विभाग हटाए जाएंगे गार्ड

प्रशासनिक कवायद: माओवाद के आतंक से मुक्ति के बाद सुरक्षा वापस लेने की तैयारी में है शासन

राजनांदगांव: अविभाजित राजनांदगांव जिला भी माओवाद से मुक्त हो गया है। राजनांदगांव और खैरागढ़ पहले ही लाल आतंक से मुक्त हो गया था। तय सीमा 31 मार्च तक मोहला-मानपुर में शेष माओवादियों के समर्पण के साथ पूरा क्षेत्र शांति के मार्ग पर लौट आया है। ऐसे में अब उन नेताओं की अतिरिक्त सुरक्षा हटने वाली है जिन्हें प्रभावित क्षेत्र का होने के कारण सुरक्षा मिली हुई है। इसके लिए पुलिस का खुफिया विभाग समीक्षा कर रहा है।

प्रदेश में बस्तर के माओवाद प्रभावित रहे जिलों से सुरक्षा हटाने या कम करने का काम शुरू हो चुका है। दूसरे चरण में अब यहां भी सुरक्षा के साथ चल रहे नेताओं के पास से शीघ्र ही पीएसओ हटा लिए जाएंगे। अविभाजित जिले के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर को मिलाकर 40 से अधिक नेताओं के पास सुरक्षा कर्मी हैं। बताया जा रहा है कि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद सुरक्षाकर्मी कम किए जाएंगे और अनावश्यक सुरक्षा लेकर चल रहे नेताओं के पास से गार्ड वापस बुला लिए जाएंगे।

चुंकि माओवाद का प्रभाव अविभाजित जिले से काफी पहले समाप्त हो चुका था, लेकिन कई जनप्रतिनिधि सुरक्षा के साथ ही चल रहे हैं। इनमें वर्तमान व पूर्व सांसद व विधायक, जिला पंचायत के पूर्व व वर्तमान सदस्यों के साथ जिला स्तर के कई नेता शामिल हैं। अधिकांश नेताओं को उपलब्ध कराए गए सुरक्षाकर्मी घरेलू काम ही कर रहे हैं। उनसे दूध व सब्जी लाने से लेकर बच्चों को स्कूल से लाने-ले जाने का ही काम कराया जा रहा है। कई नेताओं के सुरक्षाकर्मी तो आफिस का भी काम निपटा रहे हैं।

 हर वर्ष शासन का छह करोड़ रुपये से अधिक का खर्च

अविभाजित राजनांदगांव जिले में जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग स्तर की सुरक्षा मिली हुई है। इस कारण उनके पास तैनात कर्मियों की संख्या भी अलग-अलग है। मोटे अनुमान के अनुसार विस अध्यक्ष डा. रमन सिंह व पूर्व सांसद अभिषेक सिंह को छोड़ अन्य के साथ तैनात कुल 40 सुरक्षाकर्मियों पर केवल वेतन के रूप में हर वर्ष शासन का लगभग छह करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहा है। सुरक्षा में कटौती या पूरी तरह समाप्ति से शासन का फिजुलखर्च काफी हद तक कम हो जाएगा। कुछ पुलिसकर्मी नेताओं के पास अटैच होकर आराम कर रहे हैं। अब उन्हें मूल स्थानों पर लौटना होगा। इतना ही नहीं जंगल पट्टी में जाने पर नताओं को पहले जैसी पायलेटिंग सुविधा भी नहीं मिलेगी।

 तीन वर्ष पहले ही समाप्त हो चुका था माओवाद

अविभिजात जिले में माओवाद का प्रभाव तीन वर्ष पहले ही समाप्त हो चुका था। जनहानि वाली अंतिम बड़ी घटना 20 फरवरी 2023 को बोरतलाव में महाराष्ट्र सीमा पर हुई थी। इसमें जिला बल के एक हेड कांस्टेबल और छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के दो जवान बलिदान हो गए थे। हालांकि 12 जुलाई 2009 को मानपुर क्षेत्र के मदनवाड़ा व कोरकोट्टी के जंगलों में हुई घटना जिले के इतिहास का सबसे बड़ा नक्सली हमला था। तत्कालीन एसपी विनोद कुमार चौबे सहित 29 जवान बलिदान हो गए थे। इसके अतिरिक्त आठ मई 2020 को मानपुर क्षेत्र के परधौनी के पास मुठभेड़ में सब-इंस्पेक्टर श्याम किशोर शर्मा वीरगति को प्राप्त हुए थे। जवाबी कार्रवाई में चार हार्डकोर नक्सली मारे गए थे। 16 मई 2010 को सरपंच सहित छह ग्रामीणों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।



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