राजनांदगांव: शहर की यातायात व्यवस्था भगवान भरोसे नजर आ रही है। सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन यातायात नियंत्रित करने के लिए लगाए गए ट्रैफिक सिग्नल रखरखाव के अभाव में बंद पड़े हैं। शहर के अंदरूनी और आउटर क्षेत्रों में लगाए गए सिग्नलों में से गंज चौक, नंदई चौक, पेंड्री रेवाडीह और आरके नगर के सिग्नल में आए दिन खराबी आ रही है। इसके चलते आउटर से शहर में प्रवेश करने वाले भारी वाहनों की रफ्तार पर नियंत्रण नहीं रह गया है। नतीजतन दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता जा रहा है और वाहन चालक हर दिन जान जोखिम में डालकर सफर करने मजबूर हैं। रेवाडीह के पास पिछले दो दिनों से लगातार हादसे की आशंका बनी हुई है। शुकवार को मेडिकल कालेज जाने के लिए एक मोटरसाइकिल चालक सड़क पर मुड़ रहा था। इसी दौरान नागपुर से रायपुर की ओर जा रहे तेज रफ्तार ट्रेलर चालक की नजर बाइक पर पड़ी तो वह हड़बड़ा गया। उसने तत्काल जोरदार ब्रेक लगाया, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। इसी रोड में तीन दिन पहले ट्रेलर की चपेट में आने से 22 वर्षीय युवक की मौत हो गई थी।
सर्विस रोड पर सुबह से देर रात तक जाम
शहर की सर्विस रोड पर भी यातायात व्यवस्था बेपटरी हो गई है। सुबह से ही दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। यहां देर रात तक लोडिंग-अनलोडिंग का काम चलता रहता है। एक ओर यातायात विभाग सड़क पर पसरा लगाकर सामान बेचने वालों के खिलाफ सख्ती दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर रसूखदार दुकानदारों को खुली छूट मिलने के आरोप लग रहे हैं। कार्रवाई में भेदभाव की शिकायतों के बीच चंद जवानों के भरोसे पूरी व्यवस्था संचालित हो रही है। अधिकारियों की ओर से जाम और दुर्घटनाओं से निपटने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नजर नहीं आ रही है। शहर के भीतरी इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब बनी हुई है।
संकरी सड़क पर दौड़ रहे ट्रक और डंपर
रामदरबार चौक से भदौरिया चौक तक संकरी सर्विस रोड पर पूरे समय वाहनों का दबाव बना रहता है। इस मार्ग पर पहले ही भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई थी, लेकिन कुछ दिनों की सख्ती के बाद फिर से मनमानी शुरू हो गई है। ट्रक से लेकर डंपर तक इस संकरी सड़क पर तेज रफ्तार से दौड़ रहे हैं। इससे दोपहिया और छोटे वाहन चालकों के लिए हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। भारी वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही पर नियंत्रण नहीं होने से यातायात पुलिस की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। पूर्व में हो चुकी घटनाओं के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है।