राजनांदगांव :- जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के पूर्व अध्यक्ष भागवत साहू ने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की जनता अब मोदी सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली से ऊब चुकी है। जनता को अब बदलाव की आवश्यकता महसूस होने लगी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में भाजपा सरकार ने जनता को बड़े-बड़े सपने दिखाए लेकिन जमीनी स्तर पर उन वादों को पूरा करने में सरकार विफल रही है।
श्री साहू ने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले देश की जनता को अच्छे दिन, महंगाई से राहत, रोजगार, किसानों की आय दोगुनी करने और देश के सर्वांगीण विकास का भरोसा दिलाया था। लेकिन आज भी आम आदमी महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद आम जनता की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना दिखाने वाली सरकार को पहले आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। केवल बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं करने से देश का विकास नहीं होता बल्कि जनता को इसका लाभ जमीन पर दिखाई देना चाहिए। आज आम नागरिक अपने भविष्य, रोजगार और महंगाई को लेकर चिंतित है। श्री साहू ने कहा कि भाजपा और एनडीए सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है। जिस दिन देश की जनता सरकार के दावों और वास्तविकता के बीच के अंतर को पूरी तरह समझ जाएगी उस दिन भाजपा के राजनीतिक भविष्य पर इसका असर दिखाई देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाने का प्रयास कर रही है। श्री साहू ने मतदाता सूची और वोट चोरी से जुड़े आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता के मताधिकार और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सर्वोपरि है। यदि चुनाव प्रक्रिया को लेकर जनता के मन में सवाल उठते हैं तो सरकार और निर्वाचन व्यवस्था की जिम्मेदारी है कि उन सवालों का पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था को लेकर अपनी आवाज उठाती रहेगी। श्री साहू ने कहा कि देश की जनता अब केवल नारों और वादों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। जनता रोजगार, महंगाई से राहत, किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक सुधार चाहती है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जनता अपने मुद्दों और अधिकारों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस की ओर से भाजपा के विपक्ष में रहने के दौरान किए गए आंदोलनों और प्रदर्शनों की याद दिलाई गई है। आज भाजपा सत्ता में रहते हुए विपक्ष के आंदोलनों को अराजकता बताती है जबकि विपक्ष में रहते हुए उसने भी संसद से लेकर सड़कों तक सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन किए थे। वर्ष 2010 से 2013 के बीच 2जी और कोयला घोटाले के मुद्दे पर भाजपा ने संसद की कार्यवाही बाधित की थी। तत्कालीन भाजपा नेताओं सुषमा स्वराज और अरुण जेटली ने संसद में विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बताया था। इसी तरह लोकपाल विधेयक को लेकर अन्ना हजारे के आंदोलन में भी भाजपा ने समर्थन दिया था। रामलीला मैदान में हुए आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हुए थे। वर्ष 2012 के निर्भया कांड के बाद दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उस समय भाजपा ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए थे। वहीं महंगाई के मुद्दे पर तत्कालीन भाजपा नेताओं द्वारा सिलेंडर और बैलगाड़ी के साथ किए गए प्रदर्शनों की भी याद दिलाई गई। आज बेरोजगारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दल जब जनता की आवाज उठाते हैं, तो उनके आंदोलनों को गलत ठहराया जाता है। विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई के लिए ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी बात रखने तथा शांतिपूर्ण आंदोलन करने का अधिकार है। विपक्ष में रहते हुए विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बताना और सत्ता में आने के बाद विपक्ष के विरोध पर सवाल उठाना राजनीतिक दोहरे मापदंडों को लेकर बहस खड़ी करता है।